E20 पेट्रोल को लेकर गोवा CM का बड़ा दावा, बोले- ‘एक भी शिकायत नहीं मिली’
देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू होने के बाद से अब तक उपभोक्ताओं, वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल संगठनों या गैरेज संचालकों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री ने हालांकि संबंधित विभाग को E20 की स्थिति की निगरानी और इसकी टेस्टिंग कराने के निर्देश देने की बात कही है। यह मुद्दा विधानसभा में विधायकों की ओर से पुराने वाहनों, खासकर टैक्सी और दोपहिया चालकों को होने वाली संभावित परेशानियों को लेकर उठाया गया था।
विधायकों ने पुराने वाहनों का मुद्दा उठाया
विधायक वेंजी विगास, विजय सरदेसाई और क्रूज सिल्वा ने विधानसभा में ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के जरिए E20 पेट्रोल का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2023 से पहले निर्मित वाहनों के मालिकों की संभावित समस्याओं पर सरकार का ध्यान खींचा।
विधायकों ने दावा किया कि कुछ पुराने वाहनों में E20 के कारण माइलेज कम होने, परफॉर्मेंस प्रभावित होने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं को बिना ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
CM सावंत बोले- E20 केंद्र की नीति का हिस्सा
प्रमोद सावंत ने कहा कि E20 पेट्रोल से जुड़ी नीति केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है और गोवा ने इसे 2023 से अपनाया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य में अब तक E20 को लेकर किसी उपभोक्ता, वाहन मालिक, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन या गैरेज से शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि शिकायत नहीं मिलने के बावजूद सरकार स्थिति की जांच और निगरानी करेगी।
उन्होंने सिविल सप्लाइज विभाग को E20 की गुणवत्ता और स्थिति की टेस्टिंग करने के निर्देश देने की बात भी कही। मुख्यमंत्री ने उपभोक्ताओं से किसी तरह की परेशानी होने पर विभाग से संपर्क करने की अपील की।
157 आउटलेट्स पर E20 की सप्लाई
मुख्यमंत्री के लिखित जवाब के मुताबिक, गोवा में तीन ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 157 रिटेल आउटलेट्स के जरिए E20 पेट्रोल उपलब्ध करा रही हैं।
सावंत ने कहा कि ARAI, SIAM, IOCL और IIP की लैब स्टडीज और फील्ड ट्रायल्स में E20 को सुरक्षित पाया गया है। उनके मुताबिक, इन अध्ययनों में पुराने वाहनों को लेकर भी गंभीर टूट-फूट या प्रदर्शन में बड़ी कमी की पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि, E20 को लेकर अलग-अलग वाहन मॉडल, उनकी तकनीकी अनुकूलता और उपयोग की परिस्थितियों के आधार पर प्रभाव अलग हो सकते हैं। इसलिए वाहन निर्माताओं की सिफारिशों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
E10 वाहनों में माइलेज पर कितना असर?
मुख्यमंत्री ने कहा कि E10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर माइलेज में कमी आम तौर पर करीब 3 से 5 प्रतिशत तक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माता E20 के अनुरूप चलने वाले वाहनों पर वारंटी दे रहे हैं।
E20 में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक इथेनॉल का मिश्रण होता है। सरकार लंबे समय से इथेनॉल ब्लेंडिंग को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की नीति के तौर पर बढ़ावा दे रही है।
विदेशी मुद्रा बचत और किसानों को भुगतान का दावा
प्रमोद सावंत ने केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के जरिए 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम के चलते कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 952 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है और किसानों को 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पेट्रोल में मिलावट और गुणवत्ता की जांच के लिए हाल में देशभर के आउटलेट्स पर 30 हजार से अधिक क्वालिटी चेक भी किए गए हैं।
E20 पर बहस के बीच सरकार की निगरानी
गोवा में फिलहाल मुख्यमंत्री ने किसी शिकायत के नहीं मिलने की बात कही है, लेकिन विधानसभा में उठाए गए सवालों के बाद सरकार ने निगरानी और टेस्टिंग जारी रखने का संकेत दिया है।
E20 को लेकर मुख्य बहस पुराने वाहनों की अनुकूलता, माइलेज, इंजन और ईंधन प्रणाली पर संभावित प्रभाव तथा उपभोक्ताओं को उपलब्ध विकल्पों के इर्द-गिर्द है। ऐसे में अलग-अलग वाहन मॉडल और ईंधन मानकों को लेकर निर्माता की गाइडलाइन देखना जरूरी होगा।