चोरी गोदाम में हुई, जिम्मेदार बैंक ठहरा; व्यापारी को मिला ₹4.15 लाख मुआवजा
पुडुचेरी: बैंक से ओवरड्राफ्ट सुविधा लेना एक व्यापारी को उस समय भारी पड़ गया, जब उसके गोदाम में रखा लाखों रुपये का सामान चोरी हो गया। मामला कंज्यूमर कमीशन तक पहुंचा तो बैंक को ही व्यापारी को मुआवजा देने का आदेश मिला। पुडुचेरी के शांति ट्रेडर्स से जुड़े इस मामले में करीब 4.15 लाख रुपये का सामान चोरी हुआ था। व्यापारी ने स्टॉक को बैंक के पास सुरक्षा के तौर पर रखा था और सामान का बीमा भी बैंक की ओर से कराया गया था। जिला कंज्यूमर कमीशन ने बैंक को 4,15,612.29 रुपये देने के साथ 9 फीसदी ब्याज का भी निर्देश दिया।
बैंक से ओवरड्राफ्ट लिया, स्टॉक रखा था सुरक्षा में
शांति ट्रेडर्स बैंक से ओवरड्राफ्ट सुविधा का इस्तेमाल कर रहा था। इस सुविधा के बदले व्यापारी ने अपने कारोबार का स्टॉक बैंक के पास बतौर सुरक्षा रखा था। उस समय बैंकिंग व्यवस्था के तहत सामान का बीमा भी कराया गया था। इस मामले में एक अहम तथ्य यह था कि बीमा पॉलिसी का प्रीमियम व्यापारी के बजाय बैंक की ओर से भरा जा रहा था। बाद में यही व्यवस्था विवाद की मुख्य वजह बनी। सामान चोरी होने के बाद व्यापारी ने बैंक और बीमा कंपनी से नुकसान की भरपाई की मांग की, लेकिन मामला आसानी से हल नहीं हुआ।
गोदाम से करीब ₹4.15 लाख का सामान चोरी
यह घटना जुलाई 2001 की बताई गई है। व्यापारी के गोदाम से करीब 4.15 लाख रुपये मूल्य का सामान चोरी हो गया। घटना की जानकारी तत्काल पुलिस और बैंक को दी गई। व्यापारी के मुताबिक चोरी के कारण उसे बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बावजूद चोरी गए सामान और आरोपियों का पता नहीं चल सका। इसके बाद व्यापारी ने नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी और बैंक का रुख किया। यहीं से मामला विवाद में बदल गया और अंततः उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।
बीमा पॉलिसी में बदलाव से बढ़ा विवाद
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल बीमा पॉलिसी के कवरेज को लेकर सामने आया। बताया गया कि शुरुआती पॉलिसी में चोरी से होने वाले नुकसान का प्रावधान था, लेकिन चोरी के समय प्रभावी पॉलिसी में कथित तौर पर चोरी का कवरेज मौजूद नहीं था। उसमें आग से होने वाले नुकसान का कवर शामिल था। बैंक ने इसी आधार पर चोरी से हुए नुकसान की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। व्यापारी का पक्ष था कि बीमा की व्यवस्था बैंक ने की थी और उसका प्रीमियम भी बैंक ही चुका रहा था, इसलिए नुकसान की भरपाई से बैंक बच नहीं सकता।
व्यापारी पहुंचा कंज्यूमर कमीशन
बैंक और बीमा कंपनी से समाधान नहीं मिलने के बाद व्यापारी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान जिला कंज्यूमर कमीशन ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार किया। आयोग ने माना कि गोदाम से चोरी की घटना हुई थी और व्यापारी को वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ। इसके बाद आयोग ने बैंक को 4,15,612.29 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। बैंक ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन उसकी अपील को खारिज कर दिया गया। आयोग ने मुआवजे की रकम पर ब्याज देने का भी आदेश दिया।
9 फीसदी ब्याज के साथ देना होगा मुआवजा
कंज्यूमर कमीशन के आदेश के मुताबिक बैंक को व्यापारी को 4,15,612.29 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अलावा इस राशि पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का निर्देश भी दिया गया। बैंक का तर्क था कि चोरी का बीमा कवरेज उसकी जिम्मेदारी में नहीं आता था। हालांकि आयोग ने बैंक की अपील स्वीकार नहीं की। मामले में बैंक द्वारा बीमा की व्यवस्था किए जाने और पॉलिसी से जुड़े तथ्यों को महत्वपूर्ण माना गया। इस फैसले ने बैंकिंग सुविधाओं के साथ जुड़े बीमा और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर भी अहम सवाल सामने रखे हैं।
ग्राहकों के लिए क्या है इस मामले की सीख?
यह मामला उन कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो बैंक से लोन, कैश क्रेडिट या ओवरड्राफ्ट सुविधा लेते हैं और अपना स्टॉक सुरक्षा के तौर पर रखते हैं। ऐसी स्थिति में बीमा पॉलिसी की शर्तों, कवरेज और प्रीमियम भुगतान की जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। पॉलिसी में चोरी, आग और अन्य जोखिमों का कवरेज क्या है, इसकी जानकारी दस्तावेजों में जांचनी चाहिए। साथ ही पॉलिसी में किसी बदलाव की स्थिति में बैंक या बीमा कंपनी से लिखित जानकारी लेना भी महत्वपूर्ण है, ताकि बाद में नुकसान होने पर जिम्मेदारी को लेकर विवाद न खड़ा हो।