पीएम मोदी की विदेश नीति के मुरीद हुए स्कॉट मॉरिसन, बोले- राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखते हैं
: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिक सोच को मजबूत स्थान दिया है। मॉरिसन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूमिका की भी प्रशंसा करते हुए भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, तकनीक, अर्थव्यवस्था और अंतरिक्ष क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने क्वाड की सफलता के लिए भी भारत की सक्रिय भागीदारी को बेहद अहम बताया।
राष्ट्रीय हित पर केंद्रित है भारत की विदेश नीति
स्कॉट मॉरिसन ने भारत की मौजूदा विदेश नीति की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने वाली स्पष्ट और व्यावहारिक सोच को आगे बढ़ाया है। उनके मुताबिक भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के अनुरूप संबंध मजबूत कर रहा है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को उन्होंने इसी रणनीति का हिस्सा बताया। मॉरिसन ने कहा कि किसी भी देश की विदेश नीति का मूल उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना होता है और भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जयशंकर की भूमिका की भी पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने की तारीफ
मॉरिसन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूमिका की भी विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि जयशंकर ने भारत की विदेश नीति को आगे बढ़ाने में एक सक्षम सहयोगी के तौर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मॉरिसन के अनुसार भारत ने पिछले वर्षों में कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्होंने तकनीक, अर्थव्यवस्था और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भारत की संभावनाओं को काफी बड़ा बताया। उनका मानना है कि आने वाले दशकों में भारत की वैश्विक भूमिका और प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी ताकत बन सकता है भारत
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को लेकर भी बड़ा अनुमान जताया। उन्होंने कहा कि अगले 20 से 30 वर्षों में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के तेजी से विकसित होने की संभावना है। उनके मुताबिक जैसे-जैसे भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र परिपक्व होगा, देश एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभर सकता है। भारत पहले ही अंतरिक्ष अनुसंधान, सैटेलाइट तकनीक और अंतरिक्ष अभियानों में अपनी क्षमता प्रदर्शित कर चुका है। मॉरिसन ने इसे भारत की दीर्घकालिक संभावनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने तकनीकी विकास को भारत के भविष्य की वैश्विक ताकत से भी जोड़ा।
क्वाड में भारत की भूमिका को बताया निर्णायक
स्कॉट मॉरिसन ने क्वाड में भारत की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस समूह की प्रभावशीलता और भविष्य की सफलता के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। क्वाड में भारत के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं और समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। मॉरिसन ने समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती प्राथमिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है। उनके अनुसार इस दिशा में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
हिंद-प्रशांत में भारत का बढ़ता रणनीतिक प्रभाव
मॉरिसन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्वाड के एजेंडे में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समुद्री आयाम को और अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा सहयोग की जरूरत बढ़ रही है। ऐसे माहौल में भारत की भौगोलिक स्थिति, आर्थिक क्षमता और सैन्य शक्ति उसे एक महत्वपूर्ण साझेदार बनाती है। मॉरिसन की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लगातार वैश्विक मंचों पर अपनी स्वतंत्र रणनीतिक भूमिका और बहुपक्षीय साझेदारियों को मजबूत कर रहा है।