जाति जनगणना पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अब बतानी पड़ेगी जाति
जनगणना-2027 में जाति संबंधी जानकारी शामिल किए जाने के फैसले ने देश की सियासत को गरमा दिया है। केंद्र सरकार की ओर से जनगणना के दूसरे चरण के लिए 40 सवालों की सूची जारी होने के बाद जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें भी अपनी जाति बतानी होगी। उन्होंने राहुल गांधी को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि जाति संबंधी सवाल सामने आने के बाद कई राजनीतिक दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती ह
जनगणना-2027 में जाति का सवाल भी शामिल
केंद्र सरकार की ओर से जारी जनगणना-2027 के सवालों में जाति को भी शामिल किया गया है। प्रश्नावली में जाति से संबंधित सवाल को 10वें क्रम पर रखा गया है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और जाति की जानकारी दर्ज करने का प्रावधान बताया गया है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद सामान्य जनगणना में सभी जातियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी नियमित रूप से दर्ज नहीं की जाती रही है। सरकार की नई प्रश्नावली में जाति के साथ कई अन्य सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक जानकारियों को भी शामिल किया गया है।
राहुल गांधी पर गिरिराज सिंह का तीखा हमला
जाति जनगणना के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अब राहुल गांधी को भी अपनी जाति बतानी पड़ेगी। गिरिराज सिंह ने इस दौरान राहुल गांधी को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी भी की। उनके बयान के बाद जाति जनगणना को लेकर जारी राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस लंबे समय से जातिगत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठाती रही है, जबकि केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 की प्रक्रिया में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने का निर्णय लिया है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।
2011 की जनगणना से इस बार क्या बदला?
2011 की जनगणना के सामान्य फॉर्म में जाति से संबंधित जानकारी के लिए मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का उल्लेख था। अब जनगणना-2027 की प्रश्नावली में इसके साथ सामान्य रूप से जाति की जानकारी दर्ज करने का प्रावधान जोड़ा गया है। इसके अलावा इस बार प्रश्नावली का दायरा भी बढ़ाया गया है। मोबाइल नंबर, आधार और मतदाता पहचान पत्र जैसे पहचान संबंधी विवरणों के साथ बैंक खाते से जुड़ी जानकारी का प्रावधान भी बताया गया है। इससे जनगणना में परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित अधिक विस्तृत डेटा जुटाने की कोशिश दिखाई देती है।
परिवार और सामाजिक स्थिति से जुड़े सवाल
जनगणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति से कई तरह की व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी ली जाएगी। इसमें व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से उसका संबंध, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम और राष्ट्रीयता जैसे सवाल शामिल हैं। इसके अलावा धर्म और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य जाति से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। माता-पिता से जुड़ी जानकारी को भी प्रश्नावली का हिस्सा बनाया गया है। इन आंकड़ों के जरिए देश की आबादी की सामाजिक संरचना और परिवारों की स्थिति का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने की कोशिश की जाएगी।
शिक्षा और डिजिटल साक्षरता की भी होगी जानकारी
नई जनगणना में शिक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। लोगों से उनकी शैक्षणिक स्थिति, वर्तमान में किसी शिक्षण संस्थान में पढ़ाई करने या नहीं करने और उनकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी ली जाएगी। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों से उनके अध्ययन विषय की जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही डिजिटल साक्षरता से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है। इससे सरकार को देश में शिक्षा के स्तर के साथ डिजिटल क्षमता की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है और भविष्य की नीतियां तैयार करने के लिए व्यापक आंकड़े उपलब्ध हो सकते हैं।
रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी फोकस
जनगणना में लोगों की रोजगार स्थिति से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी। व्यक्ति ने पिछले एक वर्ष के दौरान काम किया है या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि क्या है और वह किस व्यवसाय या क्षेत्र से जुड़ा है, जैसे सवाल शामिल किए गए हैं। कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश और रोजगार के लिए उपलब्धता से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा व्यक्ति अपने कार्यस्थल तक कैसे पहुंचता है और काम की जगह तक आने-जाने से संबंधित विवरण भी लिया जाएगा। इन आंकड़ों से रोजगार और श्रम बाजार की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है।
जाति जनगणना पर बढ़ेगी राजनीतिक बहस
जनगणना में जाति को शामिल करने के फैसले के बाद इसका राजनीतिक असर भी व्यापक होने की संभावना है। विपक्ष लंबे समय से जातिगत आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाने और सामाजिक प्रतिनिधित्व की स्थिति स्पष्ट करने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से अब जनगणना की प्रश्नावली में जाति को शामिल किया गया है। ऐसे में आंकड़े जुटने के बाद उनके इस्तेमाल और सार्वजनिक किए जाने को लेकर भी बहस हो सकती है। फिलहाल गिरिराज सिंह के बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में ला दिया है।