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राजस्थान में बैन के बावजूद गुटखा कारोबार जारी, 100 से ज्यादा इकाइयों पर सवाल

इंट्रो: राजस्थान में तंबाकू मिश्रित गुटखा और पान मसाला कारोबार पर प्रतिबंध के बावजूद इसके बड़े पैमाने पर जारी रहने का दावा सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक राज्य में 100 से अधिक इकाइयों में तंबाकू उत्पादों का निर्माण हो रहा है और इस पूरे कारोबार का अनुमानित आकार करीब 7 हजार करोड़ रुपए बताया जा रहा है। करीब 6 हजार से अधिक लोगों के इस उद्योग से जुड़े होने की बात भी सामने आई है। कारोबार में पान मसाला और जर्दा अलग-अलग पैकेट में तैयार कर एक साथ बेचे जाने की व्यवस्था के जरिए प्रतिबंध से बचने का आरोप है। इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

कर्नाटक के फैसले से राजस्थान के प्रतिबंध पर उठे सवाल

कर्नाटक सरकार ने 10 अगस्त से गुटखा, तंबाकू युक्त पान मसाला और निकोटिन वाले कुछ उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगाने का फैसला किया है। जनस्वास्थ्य को आधार बनाकर लिया गया यह निर्णय लागू होने के बाद राजस्थान में पहले से लागू प्रतिबंध को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि प्रतिबंध के बावजूद तंबाकू मिश्रित उत्पाद बाजार तक कैसे पहुंच रहे हैं। यदि पान मसाला और जर्दा अलग-अलग पैकेट में उपलब्ध कराए जा रहे हैं, तो उनकी बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी निगरानी किस तरह हो रही है, यह भी अहम सवाल है।

गुटखा कारोबार ने लिया बड़े उद्योग का रूप

राज्य में तंबाकू उत्पादों का कारोबार अब केवल छोटी दुकानों या स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहने का दावा किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में तंबाकू उत्पादों से जुड़ी 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित होने की बात सामने आई है। इन इकाइयों में 6 हजार से अधिक लोगों के काम करने का अनुमान है। वहीं पूरे कारोबार का आकार करीब 7 हजार करोड़ रुपए बताया जा रहा है। यदि ये आंकड़े सही हैं, तो यह मामला केवल प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चल रही उत्पादन और सप्लाई चेन की निगरानी का भी बन जाता है।

अलग-अलग पाउच में पान मसाला और जर्दा

राजस्थान में प्रतिबंध के बावजूद तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सबसे बड़ा सवाल पान मसाला और जर्दा की अलग-अलग बिक्री से जुड़ा है। कथित तौर पर दोनों उत्पाद अलग-अलग पाउच में तैयार किए जाते हैं और उपभोक्ता उन्हें मिलाकर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में तैयार गुटखे के पाउच को पकड़ने भर से पूरी सप्लाई चेन पर रोक लगाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि तंबाकू नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञ उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बिक्री के सभी स्तरों पर निगरानी की जरूरत बताते हैं। केवल दुकानों पर कार्रवाई करने के बजाय निर्माण इकाइयों और थोक सप्लाई नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

जयपुर, अलवर और नागौर पर कारोबार का फोकस

उपलब्ध जानकारी में जयपुर को तंबाकू उत्पादों के थोक वितरण और बड़े बाजार के प्रमुख केंद्रों में शामिल बताया गया है। इसके अलावा अलवर, नागौर, कोटा और अन्य जिलों में पान मसाला-जर्दा से जुड़ी इकाइयों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है। इन स्थानों पर उत्पादन, भंडारण और वितरण की गतिविधियों की निगरानी प्रशासन के लिए चुनौती हो सकती है। खासतौर पर प्रतिबंधित या नियंत्रित उत्पादों की सप्लाई कई स्तरों से होकर बाजार तक पहुंचती है। ऐसे में किसी एक स्तर पर कार्रवाई के बजाय पूरी सप्लाई चेन की निगरानी ही प्रभावी नियंत्रण का आधार बन सकती है।

GST चोरी का भी जताया गया अनुमान

इस कारोबार से जुड़े संभावित राजस्व नुकसान का मुद्दा भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पान मसाला और जर्दा से जुड़े कारोबार में कथित तौर पर 450 से 1000 करोड़ रुपए तक की GST चोरी का अनुमान जताया गया है। हालांकि यह एक अनुमान है और वास्तविक कर चोरी का पता अधिकृत जांच तथा दस्तावेजों की जांच के बाद ही चल सकता है। यदि बड़े पैमाने पर कर चोरी की पुष्टि होती है तो मामला केवल स्वास्थ्य नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय और कर संबंधी जांच का विषय भी बन सकता है।

तंबाकू सेवन से जुड़ा स्वास्थ्य जोखिम गंभीर

तंबाकू उत्पादों के बढ़ते कारोबार का सबसे गंभीर पहलू इसका स्वास्थ्य पर असर है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में हर वर्ष तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। धुआं रहित तंबाकू का सेवन मुंह और गले से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ाता है। वर्ष 2022 के आंकड़ों में धुआं रहित तंबाकू और सुपारी के सेवन से जुड़े ओरल कैंसर के नए मामलों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती भी है।

राजस्थान में तंबाकू सेवन के आंकड़े चिंताजनक

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 15 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में तंबाकू सेवन का स्तर 24.7 प्रतिशत बताया गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 39.6 प्रतिशत और महिलाओं में 9 प्रतिशत बताया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में तंबाकू नियंत्रण की चुनौती कितनी बड़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक युवाओं को आकर्षित करने के लिए कई बार तंबाकू उत्पादों को आधुनिक जीवनशैली और फैशन से जोड़कर प्रचारित किया जाता है। इसलिए केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जागरूकता और युवाओं तक तंबाकू की पहुंच रोकने पर भी जोर देना जरूरी है।

विशेषज्ञ बोले- सप्लाई चेन पर हो सख्ती

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के कान-नाक-गला विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. पवन सिंघल के मुताबिक तंबाकू नियंत्रण कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है। सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन और थूकने पर रोक के साथ स्कूल स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन और युवाओं को आकर्षित करने वाली रणनीतियों पर भी सख्ती जरूरी है। इसके साथ ही उत्पादन से लेकर थोक वितरण और खुदरा बिक्री तक निगरानी मजबूत किए बिना प्रतिबंध का अपेक्षित असर हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

प्रतिबंध के बावजूद कारोबार पर कार्रवाई बड़ी चुनौती

राजस्थान में गुटखा और तंबाकू मिश्रित उत्पादों पर प्रतिबंध के बावजूद यदि बड़े स्तर पर उत्पादन और बिक्री की बात सामने आ रही है, तो यह निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। हालांकि कारोबार से जुड़े आंकड़ों और GST चोरी के अनुमानों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागों की जांच से ही हो सकेगी। अब चुनौती यह है कि प्रशासन प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की निर्माण इकाइयों, भंडारण केंद्रों और वितरण नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तंबाकू की आसान उपलब्धता सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और युवा आबादी पर असर डाल सकती है।

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Stv News Rajasthan

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