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विश्व आदिवासी दिवस पर बयान से घिरे मदन राठौड़, विरोध के बाद सफाई से संभाला मोर्चा

जयपुर। राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के विश्व आदिवासी दिवस को लेकर दिए गए बयान पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। एक इंटरव्यू में राठौड़ ने 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस की तुलना फ्रेंडशिप डे और वैलेंटाइन डे जैसे अवसरों से की और इसे ‘भेड़चाल’ से जोड़कर टिप्पणी की। बयान सामने आने के बाद भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और कांग्रेस नेताओं ने इसका विरोध किया। बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत और कांग्रेस विधायक इंदिरा मीणा समेत आदिवासी नेताओं ने इसे समाज की अस्मिता से जोड़ते हुए राठौड़ से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद राठौड़ की ओर से सफाई भी सामने आई।

बयान सामने आते ही शुरू हुआ राजनीतिक विरोध

मदन राठौड़ की टिप्पणी सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और राजनीतिक नेताओं की ओर से विरोध शुरू हो गया। विपक्षी नेताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज की संस्कृति, अधिकारों और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में इसकी तुलना अन्य दिवसों से करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी से जुड़े नेताओं ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से बयान पर स्थिति स्पष्ट करने और माफी मांगने की मांग की।

राजकुमार रोत ने UN के दिवसों का दिया उदाहरण

बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने मदन राठौड़ के बयान पर सवाल उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय दिवसों का उदाहरण दिया। रोत ने तर्क दिया कि यदि संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित विश्व आदिवासी दिवस को भारत से संबंधित नहीं माना जा सकता, तो फिर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व योग दिवस और विश्व महिला दिवस का संबंध भी भारत से नहीं होना चाहिए। उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की टिप्पणी को आदिवासी समाज के लिए आपत्तिजनक बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

कांग्रेस विधायक इंदिरा मीणा ने भी जताई नाराजगी

विश्व आदिवासी दिवस को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस विधायक इंदिरा मीणा समेत अन्य नेताओं ने भी विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और संस्कृति से जुड़े इस दिवस को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। नेताओं ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने और आदिवासी समाज से माफी मांगने की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के सामने भी इस बयान को लेकर राजनीतिक स्थिति संभालने की चुनौती खड़ी हो गई।

विवाद बढ़ा तो सफाई देकर संभालने की कोशिश

विरोध बढ़ने के बाद मदन राठौड़ की ओर से अपने बयान को लेकर सफाई दी गई। उन्होंने अपनी टिप्पणी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। विवाद के बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। विपक्षी दल जहां इसे आदिवासी समाज की भावनाओं से जोड़कर मुद्दा बना रहे हैं, वहीं भाजपा की ओर से बयान के संदर्भ को स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है। अब देखना होगा कि इस विवाद का राजनीतिक असर आगामी दिनों में कितना बढ़ता है।

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Stv News Rajasthan

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