61 करोड़ के निर्माण कार्य, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम नहीं; बारिश में जलभराव का खतरा
अलवर। राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय परिसर में करीब 61 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न निर्माण कार्य चल रहे हैं, लेकिन पूरे कैंपस के लिए समुचित ड्रेनेज व्यवस्था का अभाव सवाल खड़े कर रहा है। बारिश के दौरान विश्वविद्यालय के पुराने भवनों में पानी भरने की समस्या सामने आ रही है। वहीं, निर्माणाधीन और प्रस्तावित भवनों से बारिश के पानी की निकासी कैसे होगी, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है। ऐसे में आने वाले समय में कैंपस में जलभराव की समस्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। भवन निर्माण के साथ ही समग्र जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
नए भवन बन रहे, लेकिन बारिश के पानी की निकासी का प्लान नहीं
विश्वविद्यालय में लगातार नए भवन और अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। करीब 61 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के बीच कैंपस के समग्र ड्रेनेज सिस्टम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दिनों में पुराने भवनों में पानी जमा होने की समस्या पहले से सामने आ रही है। ऐसे में नए भवनों के निर्माण के बाद उनकी छतों और आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाले वर्षाजल की निकासी की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि समय रहते पूरे परिसर के लिए एकीकृत ड्रेनेज योजना तैयार नहीं की गई तो भविष्य में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।
कई महत्वपूर्ण भवनों की डीपीआर में भी ड्रेनेज का प्रावधान नहीं
उपलब्ध जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस, कुलपति भवन, खेल मैदान, लाइब्रेरी सहित अन्य प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन कार्यों की डीपीआर में भी कैंपस स्तर की ड्रेनेज व्यवस्था का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में केवल भवनों का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके आसपास वर्षाजल की निकासी की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी होगी। बारिश के दौरान पानी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए भवन निर्माण की योजना के साथ ही ड्रेनेज प्लान को शामिल करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
बाद में ड्रेनेज बनाने पर दोबारा खोदाई की नौबत
यदि भवन और सड़क सहित अन्य विकसित हिस्सों के निर्माण के बाद ड्रेनेज व्यवस्था तैयार की जाती है, तो कई स्थानों पर दोबारा खुदाई करनी पड़ सकती है। इससे पहले से विकसित कैंपस की सड़कें और अन्य सुविधाएं प्रभावित होने की आशंका रहेगी। साथ ही बाद में किए जाने वाले अतिरिक्त निर्माण कार्य पर अलग से खर्च भी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ दृष्टि से भी निर्माण के शुरुआती चरण में ही जल निकासी की योजना तैयार करना अधिक व्यावहारिक माना जाता है। विश्वविद्यालय में चल रहे निर्माण कार्यों के साथ समग्र ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करने से भविष्य में होने वाली परेशानी और अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।
बारिश में पुराने भवनों में पानी भरने से बढ़ी चिंता
विश्वविद्यालय परिसर में बारिश के दौरान पुराने भवनों में पानी भरने की समस्या सामने आना आने वाले समय के लिए चिंता का विषय है। यदि वर्तमान में मौजूद जल निकासी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है तो नए भवनों के जुड़ने के बाद बारिश के पानी की मात्रा और उसका बहाव भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में पूरे कैंपस के स्तर पर जल निकासी का अध्ययन कर स्थायी समाधान तैयार करने की जरूरत है। निर्माण कार्यों के साथ ड्रेनेज व्यवस्था पर भी ध्यान देने से परिसर में जलभराव, आवागमन में परेशानी और भवनों के आसपास पानी जमा होने जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।