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1000 KM की पैदल कांवड़ यात्रा, साथ चली लग्जरी स्कॉर्पियो; सीकर में दिखी अनोखी शिवभक्ति

सीकर: सावन के महीने में भगवान शिव के प्रति आस्था की अनोखी तस्वीर सीकर में देखने को मिली। करीब 20 शिवभक्त गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर एक हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय कर सीकर पहुंचे हैं। लगभग एक महीने तक चली इस यात्रा में भक्तों ने पहाड़ी रास्तों, जंगलों, पथरीले मार्गों और गर्म सड़कों को पार किया। इस कांवड़ यात्रा की खास बात यह रही कि श्रद्धालुओं के साथ एक नई लग्जरी स्कॉर्पियो भी लगातार चलती रही। वाहन पर तिरंगा और भगवान शिव का त्रिशूल लगाया गया था। अब गंगोत्री से लाया गया पवित्र जल हर्षनाथ पर्वत पर भगवान शिव के अभिषेक में इस्तेमाल किया जाएगा।

गंगोत्री से गंगाजल लेकर पैदल निकले शिवभक्त

कांवड़ यात्रा संघ के प्रमुख सुरेश कुमार सैनी अन्ना के नेतृत्व में शिवभक्तों का जत्था सीकर से गंगोत्री के लिए रवाना हुआ था। गंगोत्री पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगाजल कांवड़ में भरा और फिर पैदल सीकर की ओर लौटने की यात्रा शुरू की। करीब एक महीने तक लगातार चलते हुए जत्थे ने एक हजार किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की। इस दौरान यात्रियों को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पहाड़ों से लेकर जंगलों और पथरीले रास्तों तक यात्रा जारी रही। सीकर पहुंचने पर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और लोगों ने उनकी आस्था और संकल्प की सराहना की।

कांवड़ियों के साथ चलती रही चमचमाती स्कॉर्पियो

इस यात्रा का एक और आकर्षण श्रद्धालुओं के साथ चल रही नई लग्जरी स्कॉर्पियो रही। जानकारी के अनुसार यह वाहन भी सीकर से गंगोत्री तक गया और फिर कांवड़ियों के साथ वापस सीकर लौटा। गाड़ी के आगे तिरंगा झंडा लगाया गया था, जबकि उसके पास भगवान शिव का त्रिशूल स्थापित किया गया था। बताया गया कि वाहन में भगवान शिव की प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। पैदल कांवड़ियों के साथ लगातार चलती इस स्कॉर्पियो ने रास्ते में लोगों का ध्यान खींचा। धार्मिक आस्था और आधुनिक वाहन का यह अनोखा मेल यात्रा के दौरान आकर्षण का केंद्र बना रहा।

सीकर पहुंचने पर शिवभक्तों का हुआ भव्य स्वागत

एक हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा पूरी कर शिवभक्तों का जत्था सीकर पहुंचा तो पिपराली रोड चौराहे पर उनका स्वागत किया गया। गौवत्स संत श्री चन्द्रमा दास महाराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई। इस दौरान शिवभक्तों के स्वागत के लिए स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। यात्रा के दौरान भक्ति गीतों और भगवान शिव के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा। लंबे सफर की थकान के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। अब गंगोत्री से लाए गए गंगाजल से हर्षनाथ पर्वत पर स्थित भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।

15 वर्षों से जारी है पैदल कांवड़ की परंपरा

यात्रा संघ के प्रमुख सुरेश कुमार सैनी अन्ना के अनुसार, गंगोत्री से सीकर तक पैदल कांवड़ लाने की यह परंपरा करीब 15 वर्षों से जारी है। हर साल श्रद्धालु एक हजार किलोमीटर से अधिक का सफर पैदल पूरा करते हैं। यात्रा के दौरान कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी उनके संकल्प को नहीं रोकतीं। जंगल, पथरीले रास्ते और गर्म सड़कें इस सफर का हिस्सा बनती हैं। बताया गया कि कुछ श्रद्धालु यह लंबी दूरी नंगे पैर भी तय करते हैं। वर्षों से जारी यह यात्रा शिवभक्तों के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और संकल्प का प्रतीक बन चुकी है।

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Stv News Rajasthan

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