चित्तौड़गढ़ में अफीम किसानों का बड़ा आंदोलन, डोडा चूरा नष्टीकरण आदेश के विरोध में कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरना
डोडा चूरा नष्टीकरण और सरकारी खरीद का मुद्दा बना आंदोलन की वजह
चित्तौड़गढ़ में अफीम किसानों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र के डूंगला सहित आसपास के गांवों से हजारों किसान जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट चौराहे पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। किसानों का मुख्य विरोध आबकारी विभाग द्वारा जारी डोडा चूरा नष्टीकरण के आदेश के खिलाफ है। उनका कहना है कि वर्ष 2018 से डोडा चूरा का निस्तारण लंबित है और इसे नष्ट करने के बजाय सरकार पहले की तरह इसकी खरीद दोबारा शुरू करे। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को आमरण अनशन तक ले जाया जाएगा।
8 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर बढ़ाया दबाव
राष्ट्रीय अफीम किसान संघ के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन में किसान केवल डोडा चूरा खरीद ही नहीं, बल्कि कई अन्य नीतिगत बदलावों की भी मांग कर रहे हैं। किसानों ने 8/29 नियम समाप्त करने, सीपीएस प्रणाली खत्म करने, मॉर्फिन आधारित व्यवस्था समाप्त करने तथा डोडा चूरा का भुगतान अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य के अनुरूप किए जाने जैसी आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि वर्षों से इन मुद्दों पर सरकार से लगातार मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
रैली निकालकर पहुंचे किसान, हजारों की संख्या में हुआ प्रदर्शन
आंदोलन में शामिल किसान पहले पीजी कॉलेज परिसर में एकत्र हुए, जहां से राष्ट्रीय अफीम किसान संघ के नेतृत्व में रैली के रूप में कलेक्ट्रेट चौराहे तक पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। आंदोलन में बड़ीसादड़ी, डूंगला और आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक धरना जारी रहेगा।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, यातायात भी हुआ प्रभावित
हजारों किसानों की मौजूदगी को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। कलेक्ट्रेट चौराहे, पीजी कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहा। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई और मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई। किसानों की बसों की पार्किंग पीजी कॉलेज परिसर में कराई गई, जहां से वे पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।