जयपुर में UGC नियमों के विरोध पर करणी सेना का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट मार्च के दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन का किया इस्तेमाल
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में निकाली गई रैली कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रही थी, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर मार्च को बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक विभिन्न जिलों से जयपुर पहुंचे थे।
प्रदेशभर से पहुंचे समर्थक, कलेक्ट्रेट मार्च की थी तैयारी
प्रदर्शन में जयपुर के अलावा बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में करणी सेना के कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। संगठन ने कालवाड़ रोड स्थित रावण गेट से पानपेच होते हुए जयपुर कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। सुबह से ही प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थल पर जुटने लगे और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आगे बढ़े। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर आयोजित किया गया।
बैरिकेड्स पर रोकी गई रैली, हालात बिगड़ने पर पुलिस की कार्रवाई
कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रही रैली को पुलिस ने 200 फीट बाइपास के पास बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन के पास पहुंचने की कोशिश भी की। वहीं भीड़ में फंसी एक एंबुलेंस को प्रदर्शनकारियों और पुलिस की मदद से सुरक्षित रास्ता दिलाकर निकाला गया, जिससे किसी तरह की आपात स्थिति नहीं बनी।
24 दिन की ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ के बाद जयपुर पहुंचा आंदोलन
UGC के नए नियमों के विरोध में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने करीब 24 दिन पहले ‘सवर्ण न्याय यात्रा’ की शुरुआत की थी। यह यात्रा जयपुर से रवाना होकर बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर पहुंची और वहां से विभिन्न जिलों से गुजरते हुए रविवार को जयपुर पहुंची। यात्रा के दौरान मकराना की तबीयत बिगड़ने और बेहोश होने की खबर भी सामने आई थी। इसके बावजूद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर यात्रा जारी रखी और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जयपुर पहुंचे।
क्या हैं UGC के नए नियम और क्यों हो रहा है विरोध?
UGC के प्रस्तावित नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) और इक्वलिटी कमेटी का गठन अनिवार्य करने का प्रावधान है। नियमों के अनुसार भेदभाव से जुड़ी शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर समिति की बैठक, 15 दिनों में जांच रिपोर्ट और उसके बाद आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया तय की गई है। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ अनुदान रोकने, ऑनलाइन एवं डिस्टेंस शिक्षा कार्यक्रमों पर रोक लगाने और गंभीर मामलों में मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
इन नियमों का विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में सभी वर्गों के हितों का पर्याप्त संतुलन नहीं है। उनका यह भी तर्क है कि झूठी शिकायतों से जुड़े मामलों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से शिक्षण संस्थानों पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है। वहीं, UGC का उद्देश्य संस्थानों में समान अवसर और भेदभाव-निरोधी व्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है।
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