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रतलाम-कोटा मेमू ट्रेन पर टूटा OHE तार, तेज स्पार्किंग और धमाकों से दहशत, बड़ा हादसा टला

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले स्थित महिदपुर रोड रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक बड़ा रेल हादसा टल गया। रतलाम-कोटा मेमू ट्रेन के ऊपर अचानक ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तार टूटकर गिर गया, जिससे तेज स्पार्किंग, धमाकों जैसी आवाजें और इंजन के पास आग की लपटें दिखाई देने लगीं। घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यात्री घबराकर ट्रेन से बाहर निकलने लगे। राहत की बात यह रही कि समय रहते बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

अचानक टूटा बिजली का तार, स्टेशन पर मची अफरा-तफरी

जानकारी के अनुसार, रतलाम-कोटा मेमू ट्रेन (19103) महिदपुर रोड रेलवे स्टेशन पर खड़ी थी, तभी उसके ऊपर से गुजर रही ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन का तार अचानक टूटकर इंजन पर गिर गया। तार गिरते ही तेज स्पार्किंग शुरू हो गई और लगातार धमाकों जैसी आवाजें आने लगीं। कुछ ही क्षणों में इंजन के पास धुआं और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। अचानक हुए घटनाक्रम से ट्रेन में बैठे यात्रियों के साथ प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों में भी दहशत फैल गई और कई यात्री तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे।

बिजली सप्लाई बंद कर पाया गया आग पर काबू

घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल ओएचई लाइन की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। इसके बाद स्पार्किंग रुक गई और आग पर नियंत्रण पा लिया गया। हालांकि इस दौरान ट्रेन का पैंटोग्राफ क्षतिग्रस्त हो गया और ओएचई लाइन के कुछ उपकरणों को भी नुकसान पहुंचा। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त तार और उपकरणों की मरम्मत शुरू की। आवश्यक कार्य पूरा होने के बाद करीब दो घंटे 20 मिनट की देरी से ट्रेन को पुनः कोटा के लिए रवाना किया गया।

रेलवे ने जांच के लिए बनाई समिति

रेलवे प्रशासन ने बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पहले ओएचई तार टूटा या किसी तकनीकी खराबी के कारण स्पार्किंग हुई। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए कोटा मंडल की ओर से सुपरवाइजर स्तर की जांच समिति गठित की गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी अलग-अलग सामने आए हैं, इसलिए तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वजह स्पष्ट हो सकेगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

लगातार हो रही घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है, जिसे रेलवे और यात्रियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। समय रहते बिजली आपूर्ति बंद होने से बड़ा हादसा टल गया। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल के दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन पर भी ओएचई तार टूटने की इसी तरह की घटना सामने आई थी। लगातार ऐसी घटनाओं के बाद रेलवे की विद्युत प्रणाली, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओएचई नेटवर्क की नियमित तकनीकी जांच और समय पर रखरखाव से इस प्रकार की घटनाओं की संभावना को कम किया जा सकता है।

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