गोविंदगढ़ में दो गर्भवतियों की मौत, इलाज और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
अलवर जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में दो गर्भवती महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहला मामला ग्राम कैमासा का है, जहां 26 वर्षीय रचना पत्नी विजय सिंह को पेट दर्द और अधिक रक्तस्राव होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदगढ़ लाया गया। वहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि 108 एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूरी में निजी एंबुलेंस से उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से फिर अलवर और बाद में जयपुर रेफर किया गया। अधिक रक्तस्राव के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में देरी, डीएनसी प्रक्रिया और रेफरल सिस्टम में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
दूसरा मामला आगराकी गांव का है। यहां 28 वर्षीय माफिया पत्नी सलीम, जो आठ माह की गर्भवती थी, उस की भी मौत हो गई है , परिजनों के अनुसार महिला को आयरन इंजेक्शन लगाने की सलाह दी गई थी, लेकिन न्याणा स्थित एक कथित झोलाछाप द्वारा पथरी के दर्द का इंजेक्शन लगा दिया गया। इंजेक्शन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
इन दोनों घटनाओं ने समय पर उपचार, रेफरल व्यवस्था, एंबुलेंस सेवा और अवैध चिकित्सकों पर नियंत्रण की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रदेश में प्रसूताओं की मौत की अनेकों घटनाओं के बाद भी अलवर स्थानीय स्तर पर निगरानी प्रभावी नहीं हो सकी।
अब मौत के बाद विभाग सक्रिय , कैमासा मामले के बाद खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने संबंधित डॉक्टरों, एएनएम और नर्सिंग स्टाफ को रिकॉर्ड सहित आरसीएचओ कार्यालय, अलवर में तलब किया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
परिजनों का आरोप है कि जिस झोलाछाप के यहां महिला को इंजेक्शन लगाया गया, उसके क्लीनिक को तीन माह पहले सील किया गया था। इसके बावजूद क्लीनिक का संचालन जारी रहा, जो प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है? आखिर जिम्मेदार कौन है वही सीएमएचओ डॉक्टर योगेंद्र शर्मा सफाई देते नजर आए ।
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