कैटरेक्ट सर्जरी के बाद संक्रमण से स्वास्थ्य विभाग सतर्क, जांच के लिए सैंपल लैब भेजे गए
कुचामन सिटी के राजकीय अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद कुछ मरीजों की आंखों में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। प्रभावित मरीजों को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कर मेडिकल बोर्ड की निगरानी में उपचार शुरू किया गया है। संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे गए हैं और जांच जारी है।
ऑपरेशन के बाद मरीजों में संक्रमण, एसएमएस अस्पताल में शुरू हुआ इलाज
कुचामन सिटी के राजकीय अस्पताल में मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) सर्जरी के बाद कुछ मरीजों की आंखों में संक्रमण की शिकायत सामने आई। इसके बाद प्रभावित मरीजों को तत्काल जयपुर के एसएमएस अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
संक्रमण के कारणों की जांच, माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे गए सैंपल
नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल संक्रमण की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। मरीजों से लिए गए नमूनों को माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा गया है, जहां विस्तृत जांच के बाद संक्रमण के स्रोत और कारणों का पता लगाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संक्रमण किस कारण से फैला। फिलहाल चिकित्सकीय टीम उपचार के साथ-साथ सभी संभावित कारणों की पड़ताल कर रही है।
चिकित्सा मंत्री ने लिया जायजा, कुचामन अस्पताल भेजी जांच टीम
मामले की जानकारी मिलने के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी एसएमएस अस्पताल पहुंचे और भर्ती मरीजों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि कुचामन अस्पताल में भी विशेषज्ञों की टीम भेजी गई है, जो वहां से आवश्यक सैंपल और अन्य जानकारी एकत्र कर जांच करेगी। मंत्री के अनुसार कुल सात मरीज प्रभावित हुए हैं, जिनमें से पांच का उपचार जयपुर में जबकि दो मरीजों को अजमेर रेफर किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल बोर्ड की निगरानी में विशेषज्ञों का उपचार
एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित किया है। बोर्ड में मेडिसिन और नेत्र रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया गया है, जो मरीजों के उपचार की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों को संक्रमण नियंत्रित करने और दृष्टि सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की रणनीति तय की जा रही है।
विट्रेक्टॉमी सर्जरी और संक्रमण से बचाव पर विशेषज्ञों का जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ मरीजों की विट्रेक्टॉमी सर्जरी की गई है। यह आंख के अंदर की एक विशेष शल्य प्रक्रिया है, जिसका उपयोग गंभीर संक्रमण या रेटिना संबंधी समस्याओं के उपचार में किया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार मानसून के दौरान नमी और बैक्टीरिया की सक्रियता बढ़ने से संक्रमण का जोखिम सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो सकता है। ऐसे मौसम में ऑपरेशन के बाद संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता, नियमित जांच और चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
इसे भी पढ़ें – अलवर के युवक के पैन कार्ड पर कथित फर्जी कारोबार, 11.95 करोड़ के लेन-देन की जांच शुरू