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पंजाब चुनाव से पहले गुरु रविदास जयंती बनी सियासी केंद्र, दलित वोट बैंक पर सभी दलों की नजर

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले गुरु रविदास जयंती इस बार केवल आस्था और श्रद्धा का पर्व नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीतियों का भी अहम केंद्र बन गई है। राज्य की करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी चुनावी समीकरण तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में भाजपा, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल सभी रविदासिया समाज को अपने पक्ष में करने के लिए अलग-अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों से लेकर सामाजिक योजनाओं और विकास के मुद्दों तक, हर दल इस प्रभावशाली वोट बैंक तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

दलित वोट बैंक तय कर सकता है चुनावी नतीजे

पंजाब देश का वह राज्य है जहां अनुसूचित जाति (SC) की आबादी सबसे अधिक मानी जाती है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की लगभग 32 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से संबंधित है। दोआबा क्षेत्र में रविदासिया समाज का प्रभाव कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक माना जाता है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दल इस समुदाय के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने में जुट गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ग का समर्थन कई सीटों पर जीत और हार का अंतर तय कर सकता है।

गुरु रविदास जयंती का बढ़ा राजनीतिक महत्व

गुरु रविदास 14वीं-15वीं शताब्दी के महान संत, समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। पंजाब में रविदासिया समाज उनके प्रति गहरी आस्था रखता है। चुनावी माहौल में पड़ने वाली गुरु रविदास जयंती राजनीतिक दलों के लिए समाज से संवाद का बड़ा अवसर बन गई है। धार्मिक कार्यक्रमों में भागीदारी, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और सामाजिक संदेशों के माध्यम से दल अपने-अपने तरीके से समुदाय तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे इस बार जयंती का राजनीतिक महत्व पहले की तुलना में अधिक बढ़ गया है।

भाजपा ने रविदासिया समाज पर बढ़ाया फोकस

भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए रविदासिया समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से गुरु रविदास जयंती के अवसर पर विशेष ट्रेन चलाने के फैसले को भाजपा श्रद्धालुओं की सुविधा और संत रविदास की विरासत के सम्मान से जोड़कर पेश कर रही है। इसके अलावा पार्टी धार्मिक डेरों और सामाजिक संस्थाओं के साथ संपर्क बढ़ाकर अनुसूचित जाति समुदाय के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। भाजपा का मानना है कि सामाजिक और धार्मिक जुड़ाव चुनावी समर्थन में भी बदल सकता है।

AAP विकास कार्यों के जरिए साध रही दलित मतदाता

पंजाब में सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी अपनी सरकार की उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी गुरु रविदास जयंती पर सार्वजनिक अवकाश, राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा सुविधाओं जैसी पहलों को प्रमुखता से सामने रख रही है। इसके साथ ही सरकार इन कदमों को सामाजिक समानता और सभी वर्गों के सम्मान की नीति से जोड़ रही है। आम आदमी पार्टी का लक्ष्य अपने पारंपरिक दलित समर्थन आधार को बनाए रखना और उसे और मजबूत करना है।

कांग्रेस और अकाली दल भी बना रहे अलग रणनीति

कांग्रेस दोआबा क्षेत्र में अपने पुराने जनाधार को मजबूत करने के लिए दलित नेताओं को सक्रिय करने की तैयारी कर रही है। पार्टी का जोर शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और समान अवसर जैसे मुद्दों पर रहेगा, ताकि रविदासिया समाज के बीच अपनी पकड़ दोबारा मजबूत की जा सके। वहीं शिरोमणि अकाली दल भी गुरु रविदास की वाणी और उनके सामाजिक संदेशों को केंद्र में रखकर अपने पारंपरिक समर्थकों से दोबारा जुड़ने का प्रयास करेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ दलित वोट बैंक को लेकर सभी दलों की सक्रियता और तेज हो सकती है।

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