‘Delulu’ और ‘FOMO’ के सहारे विपक्ष पर NDA का हमला, लोकसभा में Gen Z की भाषा में छिड़ी सियासी जंग
लोकसभा में परीक्षा अनियमितताओं और एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीतिक बहस में Gen Z की लोकप्रिय शब्दावली भी सुनाई दी। सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए “Delulu” और “FOMO” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने दावा किया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठा रही है, जबकि विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
‘Delulu’ कहकर विपक्ष पर साधा निशाना
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने बहस के दौरान कहा कि विपक्ष यह मानकर चल रहा है कि देश का युवा पूरी तरह उसके साथ खड़ा है। उन्होंने इस सोच को “Delulu” यानी भ्रम की स्थिति बताया। सूर्या ने कहा कि आज का युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता चाहता है तथा सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार, युवाओं को केवल राजनीतिक नारों से नहीं बल्कि ठोस सुधारों से भरोसा मिलेगा।
राहुल गांधी पर ‘FOMO’ वाला तंज
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह “FOMO” (Fear of Missing Out) यानी किसी घटना या मौके से छूट जाने की चिंता से प्रभावित दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के विरोध कार्यक्रमों को छात्रों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनों में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जबकि सरकार ने छात्रों के साथ संवाद का रास्ता अपनाया।
विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप
एनडीए के नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्र आंदोलनों और परीक्षा संबंधी मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल वर्तमान समय तक सीमित नहीं हैं और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। वहीं सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस पर चुनिंदा मुद्दों को उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा सुधारों पर संतुलित चर्चा होनी चाहिए।
कोचिंग व्यवस्था में सुधार की भी उठी मांग
तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने परीक्षा सुधारों के साथ-साथ कोचिंग सेक्टर में भी व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नीति बनाई जानी चाहिए। इस सुझाव का कुछ अन्य एनडीए सहयोगी दलों ने भी समर्थन किया और शिक्षा व्यवस्था में समग्र सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार ने परीक्षा सुधारों का किया बचाव
सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से नए प्रावधान लाए जा रहे हैं ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके और भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।