अंतरधार्मिक विवाह पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त: जोड़े को सुरक्षा, कहा- कानून के तहत शादी का अधिकार सुरक्षित
पश्चिम बंगाल के हावड़ा में अंतरधार्मिक विवाह करने जा रहे एक जोड़े को कथित धमकियों के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुरक्षा प्रदान करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने विवाह के दिन पुलिस को चौबीसों घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरी व्यवस्था पर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामला ऐसे समय सामने आया है जब विवाह को लेकर बाहरी हस्तक्षेप और सुरक्षा संबंधी चिंताएं अदालत तक पहुंच गईं।
शादी से पहले कथित धमकियों के बाद हाईकोर्ट पहुंचा जोड़ा
हावड़ा निवासी 31 वर्षीय महिला और 35 वर्षीय पुरुष, जो लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं, विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत विवाह करने वाले हैं। याचिका में दावा किया गया कि विवाह की प्रक्रिया सार्वजनिक होने के बाद कुछ लोगों ने कथित रूप से शादी रद्द करने का दबाव बनाया और परिवार को धमकियां दीं। बढ़ते तनाव और सुरक्षा को लेकर आशंका के बीच दोनों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग की।
हाईकोर्ट ने पुलिस को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश दिया
मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए कि विवाह के दौरान जोड़े को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने कहा कि विवाह शांतिपूर्ण और कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए संपन्न कराया जाए। साथ ही संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया कि विवाह के बाद सात दिनों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
याचिका में पिता के अपहरण और दबाव के आरोप
याचिका में महिला ने आरोप लगाया कि विवाह का नोटिस जारी होने के बाद कुछ लोग उसके घर पहुंचे और शादी रद्द करने का दबाव बनाया। आरोप है कि बाद में उसके पिता को दुकान से जबरन ले जाकर विवाह न करने संबंधी लिखित आश्वासन देने के लिए मजबूर किया गया। महिला का कहना है कि लगातार मिल रही कथित धमकियों के कारण उसे अपने परिवार की सुरक्षा को देखते हुए घर छोड़ना पड़ा। इन आरोपों का न्यायिक परीक्षण और जांच संबंधित एजेंसियों के स्तर पर होना बाकी है।
महिला ने कहा- धर्म परिवर्तन नहीं होगा
याचिकाकर्ता महिला ने अदालत में स्पष्ट किया कि वह अपनी इच्छा से विवाह कर रही है और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। उसने यह भी कहा कि इस विवाह में धर्म परिवर्तन का कोई प्रश्न नहीं है तथा दोनों अपने-अपने धर्म का पालन करेंगे। महिला के अनुसार, यह दो वयस्कों का व्यक्तिगत निर्णय है और उनके निजी जीवन में बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने भी मामले को सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखा।
अदालत में बाहरी हस्तक्षेप का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान जोड़े की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि यह केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि बाहरी लोगों के कथित हस्तक्षेप का मामला है। वहीं राज्य की ओर से पुलिस ने अदालत को भरोसा दिलाया कि न्यायालय के सभी निर्देशों का पालन किया जाएगा और विवाह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। अब इस मामले में अदालत द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
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