धर्मेंद्र प्रधान को नया मंत्रालय मिलने की अटकलों पर BJP का विराम, संबित पात्रा बोले- खबरें पूरी तरह निराधार
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मोदी सरकार में दूसरा कैबिनेट मंत्रालय दिए जाने की चर्चाओं पर भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट रुख अपनाया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ऐसी सभी खबरों को पूरी तरह काल्पनिक और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पार्टी या सरकार की ओर से इस संबंध में कोई फैसला नहीं हुआ है। प्रधान के इस्तीफे के बाद उठी अटकलों पर अब बीजेपी ने आधिकारिक रूप से स्थिति साफ कर दी है।
संबित पात्रा ने अफवाहों को किया खारिज
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया से बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान को नया मंत्रालय दिए जाने संबंधी खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि प्रधान को जल्द ही किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, लेकिन इन दावों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। पात्रा ने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह काल्पनिक और निराधार हैं तथा इन्हें तथ्य मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की अटकलें केवल भ्रम पैदा कर रही हैं।
इस्तीफे के बाद तेज हुई थीं राजनीतिक चर्चाएं
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इसी बीच यह अटकलें भी सामने आईं कि उन्हें केंद्र सरकार में किसी दूसरे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि बीजेपी ने अब इन सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसी किसी भी संभावना या निर्णय की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया। राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद यह अंतरिम व्यवस्था लागू की गई। सरकार की ओर से फिलहाल शिक्षा मंत्रालय में स्थायी नियुक्ति को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने दिया था संदेश
शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए कहा था कि हाल की घटनाओं से उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचा है, लेकिन छात्रों के हित, शिक्षा व्यवस्था और देश की एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपना पद छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार के विवाद या गतिरोध से छात्रों के भविष्य को प्रभावित होने से बचाना है।