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‘झंडे अलग-अलग, तरीका वही’ : गीतांजलि आंगमो ने BJP-कांग्रेस के ट्रोल कल्चर पर उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस—की राजनीतिक कार्यशैली और सोशल मीडिया ट्रोलिंग संस्कृति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन असहमति जताने वालों को निशाना बनाने का तरीका दोनों दलों में समान दिखाई देता है। उनका कहना है कि देश को केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव की जरूरत है।

सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों दलों पर साधा निशाना

गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखने के कारण उन्हें दोनों प्रमुख दलों के समर्थकों की आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने लिखा कि जब सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब उन्हें और उनके परिवार को कथित तौर पर देशविरोधी, विदेशी एजेंट और अन्य आरोपों से जोड़ा गया। वहीं बाद में कांग्रेस के एक विरोध प्रदर्शन की आलोचना करने पर उन्हें दूसरी तरफ से राजनीतिक संबोधनों के जरिए निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, यह दिखाता है कि असहमति को स्वीकार करने की संस्कृति कमजोर होती जा रही है।

‘झंडे अलग-अलग, लेकिन राजनीति का तरीका एक जैसा’

अपनी पोस्ट में गीतांजलि ने कहा कि राजनीतिक दलों के झंडे और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन विरोध करने वालों को ट्रोल करने और उन्हें राजनीतिक खांचे में बांटने का तरीका लगभग एक जैसा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों के मतभेद को सम्मान मिलना चाहिए, न कि व्यक्ति की देशभक्ति का आकलन उसकी राजनीतिक पसंद के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए संवाद, सहमति और असहमति—तीनों का सम्मान जरूरी है।

कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर भी जताई थी आपत्ति

इससे पहले भी गीतांजलि आंगमो ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यदि किसी मुद्दे पर गंभीरता से आवाज उठानी है, तो उसे केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उनके अनुसार, जनहित के मुद्दों पर सभी पक्षों को ईमानदारी और निरंतरता के साथ काम करना चाहिए। इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा।

‘देश को नई राजनीतिक संस्कृति की जरूरत’

गीतांजलि आंगमो ने अपने संदेश के अंत में कहा कि भारत को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीति के तौर-तरीकों में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित होनी चाहिए जहां असहमति को सम्मान मिले, संवाद को प्राथमिकता दी जाए और किसी व्यक्ति की देशभक्ति का आकलन उसकी पार्टी से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कार्यों से किया जाए। उनका मानना है कि जागरूक नागरिक अब राजनीतिक विमर्श में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा रखते हैं।

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Stv News Rajasthan

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