‘धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया’, एंटी पेपर लीक बिल पर संसद में अखिलेश यादव का हमला
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल 2026 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसी दबाव का परिणाम था। अखिलेश ने सरकार की जवाबदेही, परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के भविष्य को लेकर कई सवाल भी उठाए।
‘सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए’
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों युवाओं के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जब देशभर के युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की तो सरकार को भी अपने रुख में बदलाव करना पड़ा। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि “सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए।” उनके अनुसार यह घटनाक्रम युवाओं के दबाव और लोकतांत्रिक विरोध की ताकत को दर्शाता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंत्री को हटाकर राजनीतिक नुकसान को सीमित करने की कोशिश की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इससे मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ और केवल राजनीतिक जवाबदेही से बचने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल चेहरा बदलने के बजाय उन कारणों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिनकी वजह से पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं।
सरकार से पूछा- पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि यदि सरकार अब लगातार आश्वासन दे रही है, तो पहले समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों और अभ्यर्थियों को बार-बार भरोसा दिलाने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे परीक्षाओं की निष्पक्षता पर कोई सवाल ही न उठे। उनके अनुसार सरकार की प्राथमिकता ऐसी पारदर्शी प्रणाली विकसित करना होनी चाहिए, जिस पर युवाओं का पूरा विश्वास हो।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग
अपने भाषण में अखिलेश यादव ने कहा कि देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि युवाओं का भरोसा तभी लौटेगा जब केवल कानून नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में प्रभावी सुधार दिखाई देंगे।