पेपर लीक कानून पर संसद में तीखी बहस, विपक्ष ने सरकार से पूछा- नया कानून भी विफल हुआ तो जवाबदेह कौन होगा?
देश में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर संसद में जोरदार बहस देखने को मिली। पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार से कई अहम सवाल पूछे। विपक्ष का कहना है कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार भी जरूरी हैं। वहीं सरकार का दावा है कि नया कानून पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
संसद में पेपर लीक कानून पर गरमाई बहस
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। विपक्षी सांसदों ने कहा कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उनका तर्क था कि कानून को और सख्त बनाने के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाना भी उतना ही आवश्यक है। संसद में कई सांसदों ने यह सवाल उठाया कि यदि परीक्षा प्रणाली की मूल कमियों को दूर नहीं किया गया तो नया कानून भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगा।
‘सिर्फ सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक’
बहस के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि अपराध के लिए कठोर दंड का प्रावधान जरूरी है, लेकिन उससे पहले उन कारणों को समाप्त करना होगा जिनकी वजह से पेपर लीक जैसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं। सांसदों ने परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि सिस्टम में मौजूद कमजोरियां दूर नहीं की गईं तो कठोर कानून भी सीमित प्रभाव ही छोड़ पाएगा।
‘नए कानून के बाद भी लीक हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?’
बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि संशोधित कानून लागू होने के बाद भी पेपर लीक की घटनाएं होती हैं तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि अपराध को रोकना भी होना चाहिए। विपक्ष का कहना था कि सरकार को स्पष्ट जवाबदेही तय करनी होगी ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग
कांग्रेस सांसद शशि थरूर समेत कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में केवल कानूनी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, तकनीकी ऑडिट और भर्ती एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने जैसे सुधारों की जरूरत बताई। सांसदों का कहना था कि छात्रों का विश्वास तभी लौटेगा जब परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाई जाएगी।
सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पेपर लीक केवल कानूनी नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि पहले भी परीक्षा सुरक्षा को लेकर कानून बनाए गए थे, लेकिन घटनाएं पूरी तरह नहीं रुक सकीं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले अनुभवों से क्या सीख ली गई और नए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
व्यवस्था में सुधार पर विपक्ष का जोर
आरजेडी सांसद मनोज झा और समाजवादी पार्टी के सांसद अफजल अंसारी ने कहा कि समस्या केवल कानूनों की नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जांच और कार्रवाई लंबी खिंच जाती है, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर होता है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, समयबद्ध जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ठोस रोडमैप पेश करे।
सरकार का दावा- नया कानून बनेगा मजबूत हथियार
सरकार का कहना है कि संशोधित कानून के जरिए पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर कार्रवाई संभव होगी। सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य संगठित तरीके से होने वाले परीक्षा अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को मजबूत करना है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही पर ही निर्भर करेगी।