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रूस की नौसेना को मिलेगी नई ताकत, हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस परमाणु पनडुब्बी होगी शामिल

यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। रूसी नौसेना के अनुसार, वर्ष 2026 के दौरान उसकी नई परमाणु-संचालित ‘पर्म’ (Perm) पनडुब्बी को बेड़े में शामिल किया जाएगा। दावा किया गया है कि यह ज़िरकॉन (Zircon) हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों से लैस पहली रूसी परमाणु अटैक सबमरीन होगी। साथ ही, रूस ने पोसाइडन (Poseidon) मानव रहित अंडरवाटर सिस्टम की प्रगति का भी उल्लेख किया है। हालांकि, इन सैन्य दावों का स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं है।

हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस होगी ‘पर्म’ पनडुब्बी

रूस के नौसेना प्रमुख एडमिरल अलेक्जेंडर मोइसेयेव ने नेवी डे 2026 के अवसर पर कहा कि यासेन-एम (Yasen-M) श्रेणी की ‘पर्म’ परमाणु पनडुब्बी को इस वर्ष नौसेना में शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, यह पहली ऐसी रूसी परमाणु अटैक सबमरीन होगी, जिसमें ज़िरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें तैनात की जाएंगी। रूस का दावा है कि इससे उसकी समुद्री हमला क्षमता और रणनीतिक शक्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

क्या है ज़िरकॉन मिसाइल की खासियत?

रूस ने ज़िरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल को पहली बार 2019 में सार्वजनिक रूप से पेश किया था। रूसी दावों के अनुसार, यह मिसाइल करीब 1,000 किलोमीटर तक लक्ष्य भेद सकती है और मैक 9 (ध्वनि की गति से लगभग नौ गुना) तक की रफ्तार हासिल करने में सक्षम है। साथ ही, यह उड़ान के दौरान अपना मार्ग बदल सकती है, जिससे इसे रोकना अधिक कठिन माना जाता है। इन क्षमताओं के कारण इसे रूस की सबसे आधुनिक नौसैनिक मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है।

पोसाइडन अंडरवाटर सिस्टम पर भी रूस का बड़ा दावा

रूसी नौसेना ने यह भी कहा है कि पोसाइडन मानव रहित अंडरवाटर वाहन (UUV) परियोजना में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रूस इस प्रणाली को लंबी दूरी तक संचालित होने वाले रणनीतिक हथियार के रूप में प्रस्तुत करता है। पश्चिमी देशों के सुरक्षा विशेषज्ञ भी लंबे समय से इस परियोजना पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि इसकी वास्तविक तैनाती और परिचालन क्षमता को लेकर स्वतंत्र स्तर पर सीमित जानकारी उपलब्ध है।

यूक्रेन युद्ध के बीच नौसेना विस्तार पर रूस का फोकस

यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष के बीच रूस ने इस वर्ष सुरक्षा कारणों से नेवी डे समारोह को सीमित रखा। इसके बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नौसेना मुख्यालय पहुंचकर नौसैनिक बलों की भूमिका की सराहना की। वहीं, नौसेना प्रमुख ने बताया कि 2026 के दौरान अब तक 20 नए युद्धपोत बेड़े में शामिल किए जा चुके हैं और वर्ष के अंत तक 21 अतिरिक्त जहाज भी शामिल किए जाने की योजना है। रूस का कहना है कि उसका लक्ष्य समुद्री रक्षा क्षमता को लगातार आधुनिक बनाना है।

बढ़ सकती है वैश्विक सामरिक प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस की ‘पर्म’ पनडुब्बी वास्तव में ज़िरकॉन मिसाइलों के साथ परिचालन में आती है, तो यह वैश्विक नौसैनिक शक्ति संतुलन और सामरिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, किसी भी नए सैन्य प्लेटफॉर्म की वास्तविक क्षमता का आकलन उसके परिचालन रिकॉर्ड और स्वतंत्र विश्लेषण के बाद ही संभव होता है। ऐसे में रूस के दावों को फिलहाल आधिकारिक घोषणाओं के रूप में देखा जा रहा है।

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