धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राज्यों में बढ़ा दबाव, तीन शिक्षा मंत्री विपक्ष के निशाने पर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। अब ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पंजाब के शिक्षा मंत्रियों पर भी विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अलग-अलग राज्यों में शिक्षा से जुड़े विवादों को आधार बनाकर विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और संबंधित मंत्रियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग की जा रही है। हालांकि, संबंधित राज्य सरकारें विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हमला बता रही हैं।
ओडिशा में स्कूली किताबों की त्रुटियों पर सरकार घिरी
ओडिशा में नई शिक्षा नीति के तहत प्रकाशित स्कूली पुस्तकों में बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आने के बाद राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मामले में शिक्षा विभाग पर्याप्त सतर्कता नहीं बरत सका। बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। छात्र संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते किताबों की त्रुटियां दूर नहीं की गईं और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो राज्यभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि पुस्तकों में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द संशोधित संस्करण उपलब्ध कराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर छात्रों तथा विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि केंद्र स्तर पर जवाबदेही तय हो सकती है, तो राज्यों में भी शिक्षा संबंधी खामियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं और विभिन्न मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्र संगठनों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, छात्रों को न्याय दिलाने और शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग दोहराई। कांग्रेस ने भी सरकार से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की अपील की है।
पंजाब में पेपर लीक और भर्ती विवाद बना बड़ा मुद्दा
पंजाब में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का आरोप है कि राज्य में परीक्षा प्रणाली और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं, जिससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। वहीं, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी इन आरोपों को राजनीतिक एजेंडा करार देते हुए दावा कर रही है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक जवाबदेही की बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष विभिन्न राज्यों में शिक्षा से जुड़े विवादों को लेकर सरकारों को घेर रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि हर राज्य की परिस्थितियां अलग हैं और सभी मामलों का समाधान नियमों के अनुसार किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कई राज्यों की राजनीति और विधानसभा सत्रों में भी प्रमुखता से उठ सकता है। फिलहाल तीनों राज्यों में शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।