धर्मेंद्र प्रधान के बाद मदन दिलावर भी दें इस्तीफा, सांसद राजकुमार रोत ने उठाई मांग
बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मदन दिलावर ने पहले बयान दिया था कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे तो वह भी पद छोड़ देंगे, इसलिए अब उन्हें अपना वादा निभाना चाहिए। रोत ने इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था, यूसीसी, आदिवासी अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर कई सवाल उठाए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मदन दिलावर पर हमला
सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि देशभर में छात्रों के आंदोलन और दबाव के बाद केंद्र सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में खामियों और युवाओं की नाराजगी के बावजूद सरकार को देर से फैसला लेना पड़ा।
रोत ने कहा कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने खुद बयान दिया था कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद छोड़ते हैं तो वह भी इस्तीफा दे देंगे। अब उन्हें अपने बयान पर कायम रहते हुए पद से इस्तीफा देना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर सरकार को घेरा
राजकुमार रोत ने राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में अभी भी पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं। इसके अलावा छात्राओं के लिए शौचालय और विद्यार्थियों के लिए साफ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक मुद्दों के बजाय शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर अवसर मिल सकें।
UCC को लेकर बीजेपी पर लगाए आरोप
यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सांसद रोत ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी के नाम पर समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए, जैसा कि कुछ अन्य राज्यों में व्यवस्था है। रोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान में आदिवासियों को धर्म के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांटने का प्रयास किया जा रहा है।
आदिवासी अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
सांसद राजकुमार रोत ने आदिवासी अधिकारों से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास, जमीन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने बांसवाड़ा में गर्भवती महिलाओं की मौतों और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दूरदराज के इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
लाठीचार्ज मामले पर कांग्रेस नेताओं पर निशाना
बांसवाड़ा में प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सांसद रोत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता सिर्फ बयानबाजी करते हैं, लेकिन मुश्किल समय में पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे नेताओं को समय आने पर जवाब देगी।
रोत ने कई अन्य मुद्दों पर भी रखी बात
पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजकुमार रोत ने जिनेवा सम्मेलन, आदिवासी जनजागरण अभियान और मध्यप्रदेश की केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित लोगों जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। इस दौरान आसपुर विधायक उमेश मीणा, पार्टी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।