1929 की विरासत वाला जय कृष्ण क्लब: चुनाव में प्रोग्रेसिव पैनल का दबदबा, सभी 8 प्रत्याशी विजयी
अलवर शहर के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक जय कृष्ण क्लब की विरासत 1929 से जुड़ी हुई है। शहर के मध्य स्थित यह क्लब सामाजिक संस्था के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां सदस्यता सीमित और महंगी होने के कारण आम लोगों की पहुंच आसान नहीं है। क्लब में बार, रेस्टोरेंट, स्विमिंग पूल और खेल-कूद सहित कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्लब के चेयरमैन पदेन जिला कलेक्टर होते हैं, जबकि अन्य पदों का चुनाव सदस्य करते हैं।
हाल ही में हुए चुनाव में उद्योगपति राजेश गुप्ता के नेतृत्व वाले प्रोग्रेसिव पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी 8 सीटों पर जीत दर्ज की। विजेता उम्मीदवारों में राजेश गुप्ता, अभिषेक तनेजा, राकेश रावत, रमन देवड़ा, बीएस खंडेलवाल, सीए केके खंडेलवाल, अनिल कुमार अग्रवाल और कपिल आडवाणी शामिल हैं। वहीं, बाबू झालानी के नेतृत्व वाले विजनरी पैनल के 11 में से 4 प्रत्याशी ही जीत सके, जबकि 2 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सफलता हासिल की।
जय कृष्ण क्लब की स्थापना 1929 में अलवर के महाराजा जय सिंह और भरतपुर के महाराजा कृष्ण सिंह के बीच रूपारेल नदी के जल बंटवारे को लेकर हुई ऐतिहासिक संधि की स्मृति में की गई थी। दोनों राजाओं के नाम ‘जय’ और ‘कृष्ण’ को मिलाकर क्लब का नाम रखा गया। जिस स्थान पर आज क्लब स्थित है, वह पहले रियासतकाल में ‘राठौर जी का बाग’ था, जिसकी करीब 20 बीघा भूमि और भवन महाराजा जय सिंह ने दान किए थे।
अब मंगलवार को नव निर्वाचित पैनल द्वारा नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा, जिसमें सचिव, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। माना जा रहा है कि इस बार राजेश गुप्ता को सचिव पद मिल सकता है।
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