कौन हैं राजस्थान के अमृत लाल मीणा? PM मोदी की परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में मिली अहम जिम्मेदारी
NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह सदस्यीय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति में राजस्थान के करौली जिले से ताल्लुक रखने वाले पूर्व IAS अधिकारी अमृत लाल मीणा को भी शामिल किया गया है। लंबे प्रशासनिक अनुभव और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें परीक्षा प्रणाली में सुधार की इस महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा बनाया गया है।
राजस्थान के करौली से देश की शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक का सफर
अमृत लाल मीणा राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा उपखंड स्थित डाबरा गांव के निवासी हैं। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले मीणा ने शुरुआती शिक्षा ग्रामीण परिवेश में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की और 1989 बैच के IAS अधिकारी बने। उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं।
35 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव, कई अहम पदों पर रहे
अमृत लाल मीणा का प्रशासनिक करियर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वे बिहार के मुख्य सचिव, भारत सरकार में कोयला सचिव और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) जैसे पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासनिक सुधार, सुशासन और बड़े स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में उनके अनुभव को देश के वरिष्ठ नौकरशाहों में गिना जाता है।
लॉजिस्टिक्स और नीति निर्माण में निभाई अहम भूमिका
केंद्र सरकार में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) रहते हुए अमृत लाल मीणा ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं कोयला सचिव के रूप में उनके कार्यकाल में उत्पादन बढ़ाने और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया। जटिल परियोजनाओं के प्रबंधन और बड़े स्तर पर समन्वय स्थापित करने की क्षमता को उनकी प्रमुख पहचान माना जाता है।
परीक्षा सुधार समिति में क्या होगी उनकी भूमिका?
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। अमृत लाल मीणा इस समिति में परीक्षा सामग्री की सुरक्षित आवाजाही, लॉजिस्टिक्स प्रबंधन, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही को मजबूत बनाने से जुड़े सुझाव देने में अहम भूमिका निभाएंगे। उनका अनुभव परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में उपयोगी माना जा रहा है।
देश के छह विशेषज्ञों की टीम में शामिल
परीक्षा सुधारों के लिए गठित इस हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी कर रहे हैं। समिति में पूर्व ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और पूर्व IAS अधिकारी अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टीम NTA की परीक्षा प्रणाली की समीक्षा कर व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी।
NTA में किन बदलावों पर रहेगा फोकस?
समिति परीक्षा प्रणाली में डिजिटल और फिजिकल सुरक्षा को मजबूत करने, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, तकनीक के अधिक उपयोग, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पारदर्शिता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर सुझाव देगी। सरकार का उद्देश्य भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाकर छात्रों का भरोसा बहाल करना है।