कोरबा में आकाशीय बिजली का कहर: धान रोपाई के दौरान 3 किसानों की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मानसून के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। कटघोरा क्षेत्र में खेत में धान रोपाई कर रहे किसानों पर अचानक आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौके पर ही जान चली गई। हादसे के बाद गांव में मातम छा गया, जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मौसम विभाग ने भी खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
धान रोपाई के दौरान टूटा आसमानी कहर
कटघोरा थाना क्षेत्र के ग्राम छुरी स्थित सलोरा बकरा बाजार के पास किसान बारिश के बीच धान की रोपाई कर रहे थे। खेत में करीब 30 ग्रामीण कृषि कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली खेत की मेड़ पर आ गिरी। इसकी चपेट में आने से बहोरन पाटले, लक्ष्मीचंद पाटले और श्याम साहू गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद खेत में मौजूद अन्य लोग घबरा गए और तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी।
अस्पताल पहुंचते ही तीनों किसानों को मृत घोषित किया गया
घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने तीनों घायलों को कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। एक साथ तीन किसानों की मौत की खबर फैलते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीणों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया। मानसून के दौरान लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है।
पुलिस ने जांच शुरू की, पोस्टमार्टम के बाद सौंपे जाएंगे शव
सूचना मिलने पर कटघोरा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच प्रारंभ कर दी है। देर शाम होने के कारण उसी दिन पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका, इसलिए शवों को सुरक्षित रखवाया गया। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई कर रहा है।
लगातार बढ़ रहे आकाशीय बिजली के हादसे, सतर्क रहने की अपील
मानसून के सक्रिय होने के साथ छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान खुले खेतों, ऊंचे स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित भवन या पक्के आश्रय में चले जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और समय पर मौसम संबंधी चेतावनी का पालन करने से ऐसे हादसों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
कोरबा की यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भी आकाशीय बिजली गिरने से एक घर क्षतिग्रस्त हो गया था और चार बच्चों सहित सात लोग इसकी चपेट में आ गए थे। हालांकि उस घटना में सभी घायलों की जान बच गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने स्पष्ट कर दिया है कि मानसून के दौरान मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेना और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करना समय की बड़ी जरूरत बन चुका है।
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