मुकुंदरा में तेंदुए के शिकार पर शिकंजा, तीन और आरोपी गिरफ्तार, अब तक चार गिरफ्त में
कोटा में तेंदुआ शिकार मामले में जांच तेज, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
कोटा स्थित मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मादा तेंदुए के शिकार के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई तेज करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। अब तक इस मामले में कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। वन विभाग का कहना है कि अवैध शिकार से जुड़े पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
पहले आरोपी से पूछताछ में खुली साजिश की परतें
मुख्य वन संरक्षक एवं मुकुंदरा फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। उप वन संरक्षक मुथु सोमासुंदरम के निर्देशन में चल रही जांच के दौरान 21 जुलाई को गिरफ्तार आरोपी विशाल हरिजन से पूछताछ की गई। उसके द्वारा दी गई जानकारी और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर लक्की, अर्जुन और रामपाल भील को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है और शिकार से जुड़े पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
चंबल सफारी के दौरान सामने आया था तेंदुए के शिकार का मामला
यह मामला 5 जुलाई का है, जब कोटा शहर की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम चंबल सफारी के दौरान नदी किनारे पहुंची थीं। इसी दौरान कराइयों में एक मादा तेंदुआ फंदे से लटका दिखाई दिया। सूचना मिलते ही मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक तेंदुए की मौत हो चुकी थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लगभग पांच वर्ष की मादा तेंदुआ करीब 12 घंटे तक फंदे में फंसी रही, जिससे उसकी जान चली गई। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
वन विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति, नेटवर्क की तलाश जारी
वन विभाग ने इस मामले को वन्यजीव अपराध की गंभीर श्रेणी में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि शिकार के पीछे कोई संगठित गिरोह या अवैध वन्यजीव तस्करी नेटवर्क सक्रिय तो नहीं है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में गश्त और निगरानी भी बढ़ा दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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