अहिल्यानगर में NEET अभ्यर्थी की मौत, सुसाइड नोट मिलने के बाद पुलिस जांच में जुटी
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां 19 वर्षीय एक NEET अभ्यर्थी की कथित आत्महत्या के मामले की पुलिस जांच कर रही है। छात्रा का शव उसके घर में मिला और घटनास्थल से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा परीक्षा परिणाम के बाद मानसिक तनाव में थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है।
परीक्षा परिणाम के बाद मानसिक तनाव की बात आई सामने
पुलिस के अनुसार, मृतका की पहचान अंकिता सांगले के रूप में हुई है, जो अहिल्यानगर जिले के करजत तालुका के जलालपुर गांव की रहने वाली थी। उसने इस वर्ष NEET परीक्षा में भाग लिया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घोषित परिणाम में उसे क्वालिफाइंग कटऑफ से कम अंक मिले थे। परिजनों ने बताया कि परिणाम आने के बाद वह पहले की तुलना में अधिक शांत रहने लगी थी। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
घर में मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच
शनिवार शाम परिजनों ने छात्रा को घर के एक कमरे में अचेत अवस्था में पाया, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर आकस्मिक मृत्यु (AD) का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सभी पहलुओं की जांच जारी है।
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सुसाइड नोट की भी जांच कर रही पुलिस
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला है। अधिकारियों के अनुसार, नोट को जांच का हिस्सा बनाया गया है और उसकी सामग्री का परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस ने कहा है कि नोट में लिखी बातों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और जांच पूरी होने के बाद ही आधिकारिक जानकारी साझा करने की बात कही है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव पर फिर शुरू हुई चर्चा
इस घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर बढ़ने वाले मानसिक दबाव और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञ लंबे समय से यह सलाह देते रहे हैं कि परीक्षा परिणाम को जीवन का अंतिम पैमाना नहीं मानना चाहिए और कठिन समय में परिवार, मित्रों, शिक्षकों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सहायता लेना महत्वपूर्ण होता है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि मामले से जुड़ी अपुष्ट जानकारियां या अफवाहें साझा करने से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।