PM आवास के बाहर राहुल गांधी के प्रदर्शन पर विवाद, वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग की
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब कुछ वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि हाई सिक्योरिटी जोन में हुए इस प्रदर्शन की जांच होनी चाहिए और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाने चाहिए।
हाई सिक्योरिटी इलाके में प्रदर्शन पर उठे सवाल
वकीलों ने अपने पत्र में कहा है कि 7, लोक कल्याण मार्ग देश के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित इलाकों में शामिल है। ऐसे स्थान पर बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं का पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की समीक्षा की जाए और यह तय किया जाए कि भविष्य में ऐसे इलाकों में प्रदर्शन को लेकर क्या नियम होने चाहिए।
CJI को भेजे पत्र में क्या कहा गया?
वकीलों के अनुसार, 21 जुलाई को राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता और सांसद प्रधानमंत्री आवास के पास पहुंचे थे। उनका आरोप है कि बिना अनुमति इतने संवेदनशील क्षेत्र में भीड़ का जुटना सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
प्रदर्शन खत्म करने की अपील का भी किया जिक्र
पत्र में दावा किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने नेताओं से वहां से हटने की अपील की थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा। वकीलों ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और राहुल गांधी के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया, जिसमें प्रदर्शन खत्म करने और संसद में मुद्दे पर चर्चा का भरोसा दिए जाने की बात कही गई थी।
राहुल गांधी की सोशल मीडिया अपील पर भी सवाल
वकीलों ने राहुल गांधी के उस सोशल मीडिया पोस्ट का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास जैसे संवेदनशील स्थान के पास बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
लोकतांत्रिक अधिकार और सुरक्षा के बीच संतुलन की मांग
वकीलों ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों और राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के लिए समान नियम बनाए जाने चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर
इस मामले में अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं। अगर अदालत इस मामले में सुनवाई करती है, तो देशभर के हाई सिक्योरिटी क्षेत्रों में राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर नई गाइडलाइन तय हो सकती है।