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छात्रों के समर्थन में मौन धरने पर पहुंचे अन्ना हजारे, तबीयत बिगड़ने से बीच में छोड़ना पड़ा कार्यक्रम

वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में आयोजित मौन धरने में भाग लेकर उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता जताई। हालांकि अस्वस्थ होने के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचे अन्ना की तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें निर्धारित समय से पहले ही धरना स्थल छोड़ना पड़ा। इस दौरान उनका भावुक होना भी चर्चा का विषय बना।

अस्वस्थ होने के बावजूद छात्रों के समर्थन में पहुंचे

अन्ना हजारे गुरुवार को अहिल्यानगर जिले के शिर्डी स्थित वाडिया पार्क के गांधी स्मारक में आयोजित मौन धरने में शामिल हुए। यह कार्यक्रम छात्रों के समर्थन में आयोजित किया गया था। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के बावजूद उन्होंने धरने में पहुंचकर छात्रों के प्रति अपना नैतिक समर्थन व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।

धरने के दौरान भावुक हुए अन्ना हजारे

धरना स्थल से सामने आए वीडियो में अन्ना हजारे भावुक नजर आए। छात्रों के संघर्ष और उनके भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। मौजूद लोगों के अनुसार, उन्होंने युवाओं की आवाज को लोकतंत्र में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे छात्रों के प्रति उनके नैतिक समर्थन का संदेश बताया।

सेहत बिगड़ने पर बीच में ही लौटना पड़ा

कार्यक्रम के दौरान अन्ना हजारे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने पर उन्हें कुछ ही देर बाद धरना स्थल से वापस लौटना पड़ा। हालांकि उनके जाने के बाद भी मौन धरना जारी रहा और प्रदर्शन में शामिल लोगों ने छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद रखी। आयोजकों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाना है।

पहले भी सरकार से संवाद की अपील कर चुके हैं अन्ना

इससे पहले अन्ना हजारे छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि लोकतंत्र में संवाद का रास्ता टकराव से बेहतर होता है और छात्रों की बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि जवाबदेही तय करने के लिए आवश्यक कदम उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है।

छात्र आंदोलन को मिल रहा देशभर से समर्थन

NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठा रहे हैं।

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