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दौसा समलेटी बम कांड: 30 साल पुराने केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, फांसी की सजा रद्द, नए ट्रायल का आदेश

करीब तीन दशक पुराने राजस्थान के चर्चित समलेटी बस बम विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद की फांसी की सजा रद्द कर दी है। हालांकि अदालत ने आरोपी को राहत देने के साथ-साथ मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण की नए सिरे से सुनवाई कराने का निर्देश भी दिया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को एक वर्ष के भीतर ट्रायल पूरा कराने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद देश के सबसे चर्चित बम धमाका मामलों में शामिल इस केस की कानूनी प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की फांसी की सजा?

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच प्रक्रिया और ट्रायल से जुड़े विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि इस प्रकरण में दोबारा न्यायिक परीक्षण आवश्यक है। इसी आधार पर मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद को दी गई मृत्युदंड की सजा को फिलहाल निरस्त करते हुए नए सिरे से ट्रायल कराने का निर्देश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित वरिष्ठ न्यायाधीश की विशेष अदालत में होगी और कोशिश की जाए कि पूरी प्रक्रिया एक वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाए।

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सह-आरोपी को मिली राहत, कई पुराने फैसले बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को भी राहत देते हुए उसे बरी कर दिया। उस पर विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने का आरोप था और वह उम्रकैद की सजा काट रहा था। इसके अलावा अदालत ने राजस्थान सरकार की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें पहले बरी किए गए छह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। इनमें जम्मू-कश्मीर और आगरा के आरोपी शामिल थे। इस तरह उन छह आरोपियों की रिहाई का फैसला यथावत बना रहेगा, जबकि मुख्य आरोपी के खिलाफ अब नए सिरे से मुकदमा चलेगा।

क्या था समलेटी बस बम विस्फोट मामला?

यह मामला 22 मई 1996 का है, जब आगरा से बीकानेर जा रही राजस्थान रोडवेज की एक बस दौसा जिले के समलेटी गांव के पास पहुंची थी। इसी दौरान बस में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना भीषण था कि 14 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 37 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह घटना उस समय देश के चर्चित आतंकी और विस्फोटक मामलों में शामिल हो गई थी। जांच के बाद कई लोगों को आरोपी बनाया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

तीन दशक बाद फिर खुलेगा केस, बढ़ी कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लगभग 30 वर्ष पुराने इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू होगी। नए ट्रायल के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें दोबारा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इतने पुराने मामले में गवाहों, दस्तावेजों और अन्य सबूतों का परीक्षण भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल इस मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

न्यायिक प्रक्रिया पर फिर टिकी सबकी नजर

समलेटी बम कांड वर्षों से राजस्थान के सबसे संवेदनशील मामलों में गिना जाता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस केस की दिशा पूरी तरह बदल गई है। एक ओर मुख्य आरोपी की फांसी की सजा फिलहाल समाप्त हो गई है, वहीं दूसरी ओर अदालत ने पूरे मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता खोल दिया है। अब विशेष अदालत में होने वाले नए ट्रायल पर पीड़ित परिवारों, कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता की नजर रहेगी। यह प्रक्रिया तय करेगी कि उपलब्ध साक्ष्यों और नए परीक्षण के आधार पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष क्या होगा।

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Stv News Rajasthan

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