CJP प्रदर्शन में पत्रकारों से मारपीट पर बढ़ा विवाद, कल्याण बनर्जी के बयान से सियासी घमासान
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान कुछ पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और अभद्रता की घटनाओं के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी की टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी है। वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्रकारों के साथ हिंसा की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। इस पूरे घटनाक्रम ने आंदोलन के तौर-तरीकों और मीडिया की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्रकारों के साथ कथित मारपीट के बाद बढ़ा विवाद
जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान कुछ मीडिया कर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि रिपोर्टिंग के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। इन घटनाओं ने पत्रकारों की सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों में मीडिया की भूमिका पर बहस को तेज कर दिया है। राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा संसद परिसर तक पहुंच गया और अलग-अलग दलों ने अपने-अपने नजरिए से इस पर बयान दिए।
कल्याण बनर्जी की टिप्पणी पर सियासी घमासान
संसद परिसर में पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने विवादित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी जो कर रहे हैं, वह “ठीक” कर रहे हैं। उनका कहना था कि मीडिया के कुछ वर्गों की रिपोर्टिंग को लेकर प्रदर्शनकारियों में नाराजगी है। हालांकि, उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विपक्ष और मीडिया से जुड़े कई लोगों ने इसे पत्रकारों के खिलाफ हिंसा को अप्रत्यक्ष समर्थन देने वाला बयान बताया, जबकि इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिली।
प्रियंका गांधी ने कहा— हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पत्रकारों के साथ हुई कथित हिंसा पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि किसी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार हुआ है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घटनाओं की निष्पक्ष जानकारी सामने आनी चाहिए और तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों में मीडिया की स्वतंत्र भूमिका का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।
प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्रकारों की सुरक्षा पर जताई चिंता
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी पत्रकारों के साथ कथित मारपीट की निंदा की। उन्होंने कहा कि रिपोर्टर अपना पेशेवर दायित्व निभाने के लिए मैदान में मौजूद रहते हैं और केवल हाथ में माइक होने की वजह से उन्हें निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन के उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करेंगे और मीडिया कर्मियों के साथ किसी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार से बचेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता की सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है।
आंदोलन के बीच मीडिया की भूमिका पर फिर शुरू हुई बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आंदोलन और मीडिया के संबंधों पर नई चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर प्रदर्शनकारी कुछ मीडिया संस्थानों की कवरेज पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रेस संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों का कहना है कि किसी भी मतभेद का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन उनकी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को संयम और जवाबदेही के साथ व्यवहार करना चाहिए।