#एजुकेशन #पॉलिटिक्स

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद गहराया, शशि थरूर ने उठाए सवाल; सपा ने सत्याग्रह का किया ऐलान

रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि निर्माण में कोई अनियमितता थी तो सरकार वैकल्पिक कानूनी कदम उठा सकती थी, लेकिन एक संचालित शिक्षण संस्थान को नष्ट करना उचित नहीं होगा। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी और अधिवक्ताओं ने भी इस कार्रवाई के विरोध में आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।

थरूर बोले- कार्रवाई का विकल्प हो सकता है, संस्थान नहीं टूटना चाहिए

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की आवश्यकता वाले राज्य में किसी सक्रिय विश्वविद्यालय की अधिकांश इमारतों को ध्वस्त करने का फैसला गंभीर विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ है तो सरकार जुर्माना, कानूनी दंड या अन्य वैधानिक कार्रवाई कर सकती है। उनके अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर संस्थान का संचालन सरकार अपने नियंत्रण में भी ले सकती है, लेकिन शिक्षा से जुड़े ढांचे को समाप्त करना उचित समाधान नहीं माना जाना चाहिए।

38 इमारतों पर कार्रवाई के आदेश के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को कथित रूप से अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है। इस निर्णय के बाद मामला राजनीतिक रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे पर 28 सदस्यीय टीम गठित की है, जो पूरे प्रकरण की निगरानी और आगे की रणनीति पर काम करेगी। विपक्षी दल इसे शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दे के रूप में भी उठा रहे हैं।

सपा ने सत्याग्रह की तैयारी, प्रशासन से मांगी अनुमति

समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव फिरासत हुसैन गामा ने विश्वविद्यालय परिसर के बाहर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है। उन्होंने प्रशासन को भेजे पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और उनके शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए संस्थान को बचाने की आवश्यकता है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

अधिवक्ताओं ने भी जताया विरोध, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

जौहर यूनिवर्सिटी को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के विरोध में बार एसोसिएशन और लॉयर्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकर उपजिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि विश्वविद्यालय वर्षों से शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जहां हजारों छात्र अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी, जबकि संबंधित विकास प्राधिकरण का गठन बाद के वर्षों में किया गया। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी दलीलें सामने रख रहे हैं।

इसे भी पढ़ें – ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर 12 करोड़ की साइबर ठगी, कंपनी की महिला निदेशक मुंबई से गिरफ्तार

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *