शिक्षा बजट पर रामचंद्र गुहा के सवाल, बोले- 12 वर्षों में घटी हिस्सेदारी; CJP आंदोलन के बीच छिड़ी नई बहस
NEET-UG विवाद और शिक्षा सुधार की मांगों के बीच शिक्षा बजट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने एक रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय बजट में शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी कम हुई है, जबकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का हिस्सा बढ़ा है। उनके बयान के बाद शिक्षा पर सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।
रामचंद्र गुहा ने शिक्षा बजट पर उठाए सवाल
लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए शिक्षा क्षेत्र में सरकारी निवेश को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि वर्ष 2013-14 में शिक्षा मंत्रालय की केंद्रीय बजट में हिस्सेदारी 4.6 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर 2.5 प्रतिशत रह गई है। उनके अनुसार, यह बदलाव इस बात पर चर्चा की मांग करता है कि शिक्षा क्षेत्र को सरकारी नीतियों में कितनी प्राथमिकता मिल रही है। हालांकि यह टिप्पणी एक सार्वजनिक रिपोर्ट के आधार पर की गई है और सरकार की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
बजट हिस्सेदारी को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मंत्रालय को मिलने वाली कुल राशि के साथ-साथ केंद्रीय बजट में उसकी प्रतिशत हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण संकेतक होती है। महंगाई और कुल बजट के आकार में वृद्धि के कारण अधिकांश मंत्रालयों का आवंटन बढ़ सकता है, लेकिन बजट में हिस्सेदारी यह दर्शाती है कि सरकार किस क्षेत्र को अपेक्षाकृत अधिक या कम प्राथमिकता दे रही है। इसी संदर्भ में शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी को लेकर बहस तेज हुई है।
रिपोर्ट में सड़क परिवहन मंत्रालय का भी जिक्र
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसी अवधि में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की बजटीय हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मंत्रालय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में कई बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय की बजटीय हिस्सेदारी अपेक्षाकृत स्थिर रही, जबकि कौशल विकास मंत्रालय की हिस्सेदारी में भी मामूली कमी दर्ज की गई। इन आंकड़ों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल और विशेषज्ञ अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं।
NEET विवाद के बीच शिक्षा सुधार की मांग तेज
राष्ट्रीय स्तर पर NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवादों के बाद कई छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा बजट और सरकारी निवेश पर चर्चा ने गति पकड़ ली है। विपक्षी दल भी संसद और सार्वजनिक मंचों पर शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए कई योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।
पेपर लीक मामलों पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी सुधार, सख्त निगरानी और समयबद्ध जांच आवश्यक है। वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा सुरक्षा मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनी ढांचे को और प्रभावी बनाया जा रहा है।