‘2 रील बनाओ, ₹40 हजार पाओ’ के दावे से मचा बवाल, छात्र आंदोलन पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी हलचल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। मुंबई के एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने दावा किया है कि उन्हें छात्र आंदोलन को नकारात्मक तरीके से दिखाने और सरकार के पक्ष में कंटेंट बनाने के लिए भुगतान का प्रस्ताव मिला था। इस दावे का एक वीडियो CJP ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित एजेंसी या सरकारी पक्ष की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इंफ्लुएंसर ने लगाए भुगतान वाले कंटेंट के आरोप
मुंबई के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर रुपेश यादव ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उन्हें एक मीडिया एजेंसी की ओर से ई-मेल भेजा गया। उनके अनुसार, प्रस्ताव में दो इंस्टाग्राम रील बनाने के बदले 40 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। इंफ्लुएंसर का आरोप है कि रील्स में छात्र आंदोलन को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने और सरकार की नीतियों की सराहना करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने ई-मेल का कथित स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
CJP ने वीडियो शेयर किया, लेकिन दावों की पुष्टि नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी इंफ्लुएंसर का वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। इसके बाद यह मामला राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का विषय बन गया। हालांकि, अब तक इस वीडियो या कथित ई-मेल की प्रामाणिकता की किसी स्वतंत्र एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। जिस मीडिया एजेंसी का उल्लेख किया गया है, उसकी ओर से भी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
वीडियो में उठाए गए कई सवाल
वीडियो में इंफ्लुएंसर ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह के पेड सोशल मीडिया कैंपेन चलाए जा रहे हैं, तो उनके लिए धन का स्रोत क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस प्रकार के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल केवल वीडियो में किए गए दावों पर आधारित हैं और इनके समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
छात्र आंदोलन पर राजनीतिक बयानबाजी जारी
इस घटनाक्रम के बीच छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित अनियमितताओं पर चर्चा और छात्रों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। आंदोलन और उससे जुड़े दावों के बीच अब सोशल मीडिया की भूमिका भी बहस का विषय बनती जा रही है।