#राज्य-शहर

गुजरात हाईकोर्ट पहुंची 66 वर्षीय महिला, शादी के बाद बदला नाम फिर पुराने नाम की बहाली की मांग

गुजरात के वडोदरा की 66 वर्षीय महिला ने अपने सरकारी दस्तावेजों में शादी से पहले वाला नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया है। महिला का कहना है कि विवाह के बाद अपनाए गए नाम के कारण उन्हें सामाजिक और आवास संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।

पुरानी पहचान बहाल कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका

वडोदरा निवासी 66 वर्षीय महिला ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकारी रिकॉर्ड में अपना विवाह-पूर्व नाम बहाल करने की मांग की है। याचिका के अनुसार, शादी के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया था, लेकिन अब वह अपने पुराने नाम को दोबारा आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज कराना चाहती हैं। महिला का कहना है कि यह कदम किसी कानूनी लाभ या जिम्मेदारी से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत पहचान से जुड़े कारणों और व्यावहारिक कठिनाइयों के चलते उठाया गया है।

आवास संबंधी कठिनाइयों का किया उल्लेख

याचिका में महिला ने कहा कि वर्ष 2021 में पति से अलग रहने के बाद उन्हें नया आवास तलाशने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर उनके वर्तमान नाम को लेकर दिक्कतें आईं, जिसके कारण उन्होंने अपना विवाह-पूर्व नाम वापस अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने अदालत से कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपनी पहचान को पुनः स्थापित करना और सामान्य जीवन जीना है।

इसे भी पढ़ें – बांकीपुर उपचुनाव के बीच जन सुराज का बड़ा आरोप, पुलिस पर कार्यकर्ताओं को परेशान करने का दावा

सरकारी प्रक्रिया में आई कानूनी बाधा

महिला का कहना है कि जब उन्होंने नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया तो संबंधित अधिकारियों ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का तर्क था कि आवश्यक कानूनी दस्तावेज, विशेष रूप से वैवाहिक स्थिति से जुड़े रिकॉर्ड, उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

अदालत ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, सरकारी मुद्रण विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत अब यह देखेगी कि मौजूदा नियमों के तहत महिला की मांग पर किस प्रकार विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

पहचान और अधिकारों से जुड़ा बना कानूनी मुद्दा

यह मामला केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत पहचान, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़े व्यापक प्रश्न भी सामने लाता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है, जहां कोई व्यक्ति विवाह या अन्य कारणों से बदले गए नाम को दोबारा पूर्व स्थिति में लाना चाहता हो।

https://x.com/stvnewsonline

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *