शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: ‘जो गोरक्षा कानून की गारंटी देगा, वोट उसी को मिलेगा’
अयोध्या प्रवास के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा कानून को लेकर केंद्र सरकार और राजनीतिक दलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब मतदाताओं को केवल उन्हीं दलों का समर्थन करना चाहिए, जो गोरक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी गारंटी देने का वादा करें। साथ ही उन्होंने राम मंदिर प्रबंधन और उससे जुड़े मुद्दों पर भी अपनी नाराजगी जताई।
‘गोरक्षा पर कानून नहीं, सिर्फ चुनावी वादे किए गए’
अयोध्या में मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि देश में करोड़ों लोगों की आस्था गाय से जुड़ी है, लेकिन अब तक राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी गोरक्षा कानून नहीं बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दल चुनाव के दौरान गोरक्षा का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते। उनके अनुसार, केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से नहीं बल्कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था से ही गोरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
‘अब वोट उसी को मिलेगा, जो कानूनी गारंटी देगा’
शंकराचार्य ने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत मतदाता के पास होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि भविष्य में मतदान करते समय गोरक्षा कानून को प्रमुख मुद्दा बनाया जाए। उनका कहना था कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जो राजनीतिक दल गोरक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी गारंटी देगा, समर्थन उसी को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर देशभर में जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा।
राजनीतिक दलों को दिया 6 से 8 महीने का समय
शंकराचार्य ने बताया कि उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए छह से आठ महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि में कोई दल गोरक्षा को लेकर ठोस पहल करता है, तो जनता उसके रुख का मूल्यांकन करेगी। उनके अनुसार, यह समय राजनीतिक दलों के लिए अपनी प्रतिबद्धता साबित करने का अवसर है।
सरकार से भी पूछे सवाल
उन्होंने कहा कि लंबे समय से सत्ता में रहने वाली सरकार से जनता की अपेक्षाएं अधिक होती हैं। शंकराचार्य ने कहा कि वर्षों से गोरक्षा को लेकर उम्मीदें जताई जाती रही हैं, लेकिन अब तक राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक कानून लागू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि जनता के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि इतने लंबे समय के बाद भी इस दिशा में अपेक्षित कदम क्यों नहीं उठाए गए।
राम मंदिर प्रबंधन पर भी जताई नाराजगी
शंकराचार्य ने अयोध्या के राम मंदिर प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में कमियां हैं, तो केवल कुछ व्यक्तियों को बदलने से समाधान नहीं निकलेगा। उनके अनुसार, मंदिर प्रबंधन को लेकर कई संतों और श्रद्धालुओं के मन में सवाल हैं, जिनका समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
SIT जांच और पारदर्शिता पर दिया जोर
राम मंदिर से जुड़े मामलों की जांच पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जांच पूरी निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर जवाब की अपेक्षा थी, उन पर अभी स्पष्टता नहीं आई है। उनका मानना है कि सभी संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच से ही लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
संतों और गोरक्षा समर्थकों से करेंगे संवाद
शंकराचार्य ने बताया कि अयोध्या प्रवास के दौरान वे साधु-संतों और गोरक्षा समर्थकों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य गोरक्षा के मुद्दे पर व्यापक जनजागरूकता फैलाना और इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को आगे बढ़ाना है।