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परिसीमन बिल पर कांग्रेस को DMK पर भरोसा, BJP से नजदीकी की अटकलों पर दिया बड़ा बयान

मानसून सत्र में संभावित परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डीएमके और बीजेपी की बढ़ती नजदीकियों की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने भरोसा जताया है कि परिसीमन जैसे अहम मुद्दे पर डीएमके सरकार का नहीं, बल्कि विपक्ष का साथ देगी। कांग्रेस का कहना है कि वैचारिक स्तर पर बीजेपी और डीएमके का साथ आना संभव नहीं है।

BJP-DMK संबंधों पर कांग्रेस का जवाब

बीजेपी और डीएमके के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चाओं पर कांग्रेस ने साफ किया है कि दोनों दलों की विचारधारा पूरी तरह अलग है। कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि बीजेपी और डीएमके कभी एक नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक अटकलें अपनी जगह हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति संसद में सामने आएगी। कांग्रेस का मानना है कि डीएमके भले ही इंडिया गठबंधन से अलग हो चुकी हो, लेकिन वह अभी भी विपक्षी दल है और किसी भी संवैधानिक मुद्दे पर एनडीए का हिस्सा नहीं है।

परिसीमन बिल को लेकर क्यों बढ़ी हलचल

सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार केंद्र सरकार मानसून सत्र में 131वां संविधान संशोधन विधेयक फिर से पेश करने की तैयारी कर सकती है। इस प्रस्तावित संशोधन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और भविष्य के परिसीमन की प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त करने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यदि ऐसा विधेयक आता है तो इसे पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी।

पहले भी बहुमत नहीं जुटा सकी थी सरकार

अप्रैल 2026 में संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी, जिसके कारण प्रस्तावित संविधान संशोधन आगे नहीं बढ़ पाया। विपक्ष की एकजुटता उस समय सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी थी। अब राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं और सभी दलों की रणनीति पर नजर बनी हुई है।

बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच विपक्ष की परीक्षा

हालिया विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी दलों के बीच नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं। विभिन्न दलों के भीतर हुए बदलावों और नए संसदीय समीकरणों ने संसद में संख्या बल को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। इसी वजह से परिसीमन विधेयक को लेकर अलग-अलग राजनीतिक संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यदि विधेयक पेश होता है तो विभिन्न विपक्षी दल किस तरह का रुख अपनाएंगे।

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Stv News Rajasthan

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