रथ यात्रा से पहले पुरी पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, शंकराचार्य से लिया आशीर्वाद; दिल्ली में जारी है सोनम वांगचुक का अनशन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान गुरुवार को ओडिशा के पुरी पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से पहले गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। दूसरी ओर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। दोनों घटनाक्रम एक साथ चर्चा का विषय बने हुए हैं।
पुरी में शंकराचार्य से लिया आशीर्वाद
धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र और खेल एवं युवा सेवा मंत्री सूर्यवंशी सूरज के साथ गोवर्धन पीठ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और रथ यात्रा की तैयारियों में भी हिस्सा लिया।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
शंकराचार्य से मुलाकात के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि रथ यात्रा जैसे पावन अवसर पर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने के बाद वे भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने रथ यात्रा को सनातन परंपरा का महान उत्सव बताते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं।
रथ यात्रा की अंतिम तैयारियां पूरी
पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक रथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पारंपरिक ‘पहांडी’ अनुष्ठान के तहत तीनों देव विग्रह मंदिर से बाहर आएंगे और अपने-अपने रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। रथ यात्रा को लेकर प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक तैयारियां की हैं।
जंतर-मंतर पर जारी है सोनम वांगचुक का अनशन
उधर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। उनका अनशन कई दिनों से जारी है और उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। विभिन्न राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों ने उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है।
शिक्षा व्यवस्था पर बहस तेज
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर शुरू हुआ यह आंदोलन लगातार चर्चा में है। इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान का पुरी दौरा भी सुर्खियों में रहा। एक ओर सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय नजर आई, वहीं दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी है।