रायपुर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, कार खराब होने पर कंपनी देगी नई गाड़ी या 21.60 लाख रुपये
एथेनॉल मिश्रित E-20 पेट्रोल से कार खराब होने के मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि वाहन का इंजन E-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था, जिसके कारण बार-बार तकनीकी समस्या सामने आई। उपभोक्ता आयोग ने कार निर्माता कंपनी और डीलर को आदेश दिया है कि वे पीड़ित ग्राहक को या तो उसी मॉडल की E-20 सपोर्टेड नई कार उपलब्ध कराएं या फिर करीब 21.60 लाख रुपये की राशि लौटाएं। इस फैसले को E-20 पेट्रोल विवाद से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉक्टर की शिकायत पर आया फैसला
रायपुर के सड्डू निवासी डॉ. प्रेमराज देवता ने 3 जून 2024 को ग्रैंड विटारा कार खरीदी थी। कुछ महीनों बाद 11 नवंबर 2024 को वाहन में खराबी आने लगी, जिसके बाद उन्होंने कार को कंपनी के सर्विस सेंटर पहुंचाया। वहां जांच के बाद खराबी का कारण कथित तौर पर मिलावटी पेट्रोल बताया गया। इसके बाद कई बार मरम्मत और पेट्रोल टंकी की सफाई की गई, लेकिन वाहन की समस्या लगातार बनी रही। परेशान होकर कार मालिक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
लैब रिपोर्ट में पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवाल
कार मालिक ने खराबी का कारण पता लगाने के लिए पेट्रोल का सैंपल मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब में जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट में सामने आया कि पेट्रोल की गुणवत्ता वाहन के इंजन के अनुकूल नहीं थी, जिसके कारण इंजन में बार-बार समस्या आ रही थी। डॉ. देवता का कहना था कि कंपनी और डीलर ने वाहन में निर्माण संबंधी कमी मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर न्याय की मांग की।
कंपनी को नई कार या 20.50 लाख रुपये लौटाने का आदेश
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कून्डु और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कंपनी और डीलर को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा। आयोग ने निर्देश दिया कि ग्राहक को E-20 पेट्रोल सपोर्ट करने वाली उसी मॉडल की नई कार दी जाए या फिर वाहन की कीमत 20,50,494 रुपये वापस किए जाएं। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है।
देरी होने पर देना होगा ब्याज
आयोग के आदेश के अनुसार यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो कंपनी को अतिरिक्त रूप से 7 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि कंपनी की ओर से इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई या प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
E-20 पेट्रोल को लेकर क्यों उठ रहे सवाल
भारत सरकार E-20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है। हालांकि कुछ वाहन मालिकों ने E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद माइलेज कम होने और इंजन संबंधी परेशानियों की शिकायतें भी की हैं। रायपुर का यह मामला इसी बहस के बीच सामने आया है, जहां वाहन मालिक ने पेट्रोल की गुणवत्ता और वाहन अनुकूलता को लेकर सवाल उठाए थे।
फैसले को E-20 विवाद में अहम माना जा रहा
रायपुर उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में E-20 ईंधन को लेकर चर्चा तेज है। विशेषज्ञों के अनुसार नए ईंधन मानकों के लिए वाहनों की तकनीकी अनुकूलता और सही गुणवत्ता वाला ईंधन दोनों महत्वपूर्ण हैं। इस मामले में अंतिम प्रभाव आगे आने वाले ऐसे ही मामलों और कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।