नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र में भारत की नई पहल, मोनेस्ट्री प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू
नेपाल के सोलुखुम्बु जिले, जिसे माउंट एवरेस्ट का प्रवेश द्वार माना जाता है, में भारत की सहायता से एक नए मोनेस्ट्री (मठ) प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू हुआ है। इस परियोजना पर लगभग 33 मिलियन नेपाली रुपये खर्च किए जाएंगे। यह सोलुखुम्बु में भारत का छठा हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (HICDP) है और इसे दोनों देशों की विकास साझेदारी का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लिखु पाइक में रखी गई आधारशिला
मठ निर्माण परियोजना की आधारशिला मंगलवार को लिखु पाइक ग्रामीण नगरपालिका में रखी गई। समारोह में ग्रामीण नगरपालिका की अध्यक्ष मीना कार्की बस्नेत और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के सेकेंड सेक्रेटरी अजय कुमार सिंह मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से परियोजना का शुभारंभ किया।
भारत देगा 33 मिलियन नेपाली रुपये की सहायता
भारतीय दूतावास के अनुसार इस परियोजना के लिए भारत सरकार लगभग 3.3 करोड़ नेपाली रुपये (33 मिलियन नेपाली रुपये) की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी। परियोजना का क्रियान्वयन लिखु पाइक ग्रामीण नगरपालिका के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक ढांचे को मजबूत करना है।
सोलुखुम्बु में भारत का छठा HICDP
यह परियोजना सोलुखुम्बु जिले में भारत द्वारा समर्थित छठा हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है। भारत नेपाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक संरचनाओं से जुड़ी कई परियोजनाओं को इसी मॉडल के तहत सहयोग देता रहा है। HICDP कार्यक्रम पड़ोसी देशों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों पर केंद्रित है।
स्थानीय नेतृत्व ने जताया आभार
परियोजना के शुभारंभ के दौरान मीना कार्की बस्नेत ने नेपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में भारत की निरंतर विकास सहायता की सराहना की। भारतीय दूतावास ने भी कहा कि यह परियोजना दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद विकास सहयोग का प्रतीक है तथा स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएगी।
1950 के दशक से जारी है विकास सहयोग
भारत और नेपाल के बीच विकास साझेदारी का इतिहास कई दशकों पुराना है। आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग की शुरुआत 1951 में काठमांडू के गौचर हवाई अड्डे के निर्माण से हुई थी, जिसे बाद में भारत की सहायता से पूरा किया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच विकास परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और संपर्क सुविधाओं में सहयोग लगातार बढ़ता गया है।
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