18वें दिन भी अनशन पर डटे सोनम वांगचुक, सरकार से बातचीत की मांग तेज
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर शुरू हुए इस आंदोलन को लेकर अब सरकार से बातचीत की मांग तेज हो गई है। प्रदर्शनकारी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च निकालने की भी तैयारी कर रहे हैं।
18वें दिन भी जारी रहा अनशन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करना है। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के कारण छात्रों का भरोसा प्रभावित हुआ है। इसी मांग को लेकर सरकार से औपचारिक बातचीत शुरू करने की अपील की जा रही है।
स्वास्थ्य को लेकर जताई गई चिंता
आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि लंबे अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन 8 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है। साथ ही उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने और ब्लड प्रेशर कम होने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। समर्थकों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद वांगचुक अपनी मांगों पर कायम हैं।
बातचीत के बिना अनशन समाप्त करने से इनकार
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, सोनम वांगचुक से कई लोगों ने अनशन समाप्त करने की अपील की, लेकिन उन्होंने सरकार के साथ सार्थक बातचीत शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है।
कई सार्वजनिक हस्तियों ने दिया समर्थन
इस आंदोलन को लेकर विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन भी सामने आया है। अभिनेत्री जीनत अमान ने सरकार से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की बात कहते हुए आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। इससे आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक चर्चा मिल रही है।
20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च की तैयारी
प्रदर्शनकारी अब 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता शुरू होती है या आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेता है।