PoK में चुनाव से पहले बढ़ा तनाव, आरक्षित सीटों के मुद्दे पर तेज हुआ विरोध प्रदर्शन
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान चुनाव कार्यक्रम में बदलाव के संकेत नहीं दे रहा है। प्रदर्शनकारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन तय समय पर चुनाव कराने की तैयारी में जुटा है।
चुनाव कार्यक्रम पर कायम है पाकिस्तान प्रशासन
पाकिस्तान के चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि चुनाव निर्धारित समय पर और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दावा किया है और कहा है कि चुनाव कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव प्रस्तावित नहीं है।
आरक्षित सीटों को लेकर जारी है आंदोलन
प्रदर्शनों की मुख्य वजह शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों का मुद्दा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों का क्षेत्रीय राजनीति पर प्रभाव बढ़ता है। संगठन इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार का इस मुद्दे पर अलग रुख है और उसने संगठन पर प्रतिबंध भी लगाया है।
कई सप्ताह से जारी हैं विरोध प्रदर्शन
PoK के विभिन्न हिस्सों में पिछले कई सप्ताह से प्रदर्शन जारी हैं। रावलकोट और अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की भी खबरें सामने आई हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।
मुजफ्फराबाद मार्च की चेतावनी
आंदोलनकारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे। उनका कहना है कि वे आरक्षित सीटों के मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। दूसरी ओर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की तैयारी की है।
वायरल वीडियो और दावों की नहीं हुई स्वतंत्र पुष्टि
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए दिखाया जा रहा है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वायरल वीडियो और उनमें किए जा रहे दावों को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए। फिलहाल क्षेत्र की स्थिति पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।