Kota University News: 10 करोड़ का चंबल जल प्रोजेक्ट तैयार, फिर भी 1500 छात्र खारा पानी पीने को मजबूर
कोटा यूनिवर्सिटी में चंबल का मीठा पानी पहुंचाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया जल प्रोजेक्ट पूरी तरह बनकर तैयार है। पाइपलाइन बिछ चुकी है, पानी की टंकी तैयार है और सफल टेस्टिंग भी हो चुकी है। इसके बावजूद उद्घाटन नहीं होने के कारण करीब 1500 छात्र अब भी बोरवेल का खारा पानी पीने को मजबूर हैं।
23 साल बाद पूरी हुई बड़ी योजना
साल 2003 में स्थापित कोटा यूनिवर्सिटी में शुरुआत से ही मीठे पानी की समस्या बनी हुई थी। कैंपस की पथरीली जमीन के कारण यहां का भूजल खारा है, जिससे पेयजल के साथ-साथ हरियाली बनाए रखना भी चुनौती रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अकेलगढ़ वाटर फिल्टर प्लांट से कैंपस तक चंबल का पानी पहुंचाने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, जो अब पूरा हो चुका है।
टेस्टिंग सफल, फिर भी सप्लाई शुरू नहीं
प्रोजेक्ट के तहत मुख्य ओवरहेड टैंक का निर्माण, पूरी वितरण पाइपलाइन और सिस्टम की प्रेशर व लीकेज टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। पहले 9 जुलाई को उद्घाटन प्रस्तावित था, लेकिन कार्यक्रम स्थगित हो गया। अब अगले सप्ताह उद्घाटन होने की संभावना जताई जा रही है।
छात्रों को खारा पानी, स्टाफ के लिए कैंपर
उद्घाटन में देरी के कारण छात्रों के लिए लगे वॉटर कूलरों में अब भी नलकूप का खारा पानी ही उपलब्ध है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन 100 से अधिक पानी के कैंपर मंगाए जा रहे हैं, जो दोपहर तक खत्म हो जाते हैं।
छात्रों ने जल्द शुरू करने की मांग उठाई
छात्रों का कहना है कि जब पूरा सिस्टम तैयार है और टेस्टिंग भी सफल हो चुकी है, तो केवल उद्घाटन की औपचारिकता के कारण पानी की सप्लाई रोकना उचित नहीं है। उनका कहना है कि वीआईपी कार्यक्रम का इंतजार किए बिना तुरंत चंबल के मीठे पानी की आपूर्ति शुरू की जानी चाहिए।
कुलगुरु बोले- जल्द होगा उद्घाटन
यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने बताया कि 23 साल के लंबे इंतजार के बाद विश्वविद्यालय को चंबल का मीठा पानी मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तकनीकी परीक्षण पूरे हो चुके हैं और आगामी सप्ताह में परियोजना का उद्घाटन होने की उम्मीद है, जिसके बाद कैंपस में नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।