रूस के डीजल निर्यात पर रोक से वैश्विक बाजार में हलचल, भारत के लिए चुनौती भी और अवसर भी
रूस द्वारा डीजल निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने के फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई चिंता पैदा कर दी है। इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। भारत के लिए इसका असर दोहरा हो सकता है। जहां एक ओर आयात लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं भारतीय रिफाइनरियों के लिए निर्यात से कमाई के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
रूस के फैसले से क्यों मचा वैश्विक बाजार में हड़कंप?
रूस दुनिया के प्रमुख डीजल निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में उसके निर्यात पर रोक लगने से वैश्विक बाजार में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पहले से सीमित आपूर्ति और बढ़ती मांग के बीच इस फैसले ने डीजल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कई देशों में ईंधन की लागत और परिवहन खर्च बढ़ सकते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत के लिए रूस का यह फैसला सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह के प्रभाव ला सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल महंगा होने से आयात लागत और घरेलू महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। वहीं दूसरी ओर, भारत बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदता है और उसकी रिफाइनिंग क्षमता मजबूत है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां तैयार डीजल को यूरोप, एशिया और अन्य देशों में ऊंचे दाम पर निर्यात कर अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर सकती हैं।
डीजल की कीमतें बढ़ने से किन क्षेत्रों पर असर पड़ेगा?
डीजल का उपयोग परिवहन, कृषि, उद्योग, बिजली उत्पादन और निर्माण गतिविधियों में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ ईंधन बाजार तक सीमित नहीं रहता। माल ढुलाई महंगी होने से वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई, ट्रैक्टर और हार्वेस्टर चलाने की लागत बढ़ने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता
रूस के फैसले के साथ ही पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर और दबाव बढ़ा या प्रमुख समुद्री मार्गों पर व्यवधान आया तो डीजल समेत अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और तेजी आ सकती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार फिलहाल हर नए घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में रूस की निर्यात नीति, वैश्विक मांग और पश्चिम एशिया की स्थिति डीजल बाजार की दिशा तय करेगी। यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं। भारत के लिए यह समय घरेलू आपूर्ति संतुलित रखने के साथ-साथ निर्यात के अवसरों का लाभ उठाने का भी हो सकता है।