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सोनम वांगचुक बोले- ‘मैं गांधी नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनिए’, संसद मार्च में शामिल होने की अपील

सोनम वांगचुक बोले- मैं गांधी नहीं, खुद हीरो बनिए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के दौरान शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लोगों से आंदोलन को किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह न तो गांधी हैं और न ही कोई हीरो, बल्कि एक सामान्य नागरिक हैं। साथ ही 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में अधिक से अधिक लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने का आग्रह किया।

अनशन जारी, स्वास्थ्य पर नजर

जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे धरने के बीच सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है। आंदोलन से जुड़े आयोजकों के अनुसार, उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है। जारी स्वास्थ्य अपडेट में बताया गया कि लगातार उपवास के कारण उनके वजन में कमी आई है और चिकित्सकीय मानकों के अनुसार उनकी सेहत पर नजर रखी जा रही है।

‘मुझे गांधी या हीरो मत कहिए’

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें “आधुनिक गांधी” या “हीरो” कहे जाने में सहज महसूस नहीं होता। उन्होंने कहा कि वह केवल एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपना दायित्व निभाने की कोशिश कर रहे हैं। वांगचुक ने लोगों से अपील की कि वे किसी नेता या नायक का इंतजार करने के बजाय स्वयं आगे बढ़कर समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाएं।

छात्रों के मुद्दों पर समाज से आगे आने की अपील

वांगचुक ने परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों का जिक्र करते हुए समाज से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि लोग रोज आंदोलन में शामिल नहीं हो सकते, तो कम से कम एक दिन अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं या अपने-अपने स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से समर्थन व्यक्त करें। उनका कहना था कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करती है।

20 जुलाई के प्रस्तावित संसद मार्च का आह्वान

सोनम वांगचुक ने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण संसद मार्च में भाग लेने की अपील दोहराई। उनका कहना है कि इस मार्च का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों का ध्यान आंदोलन से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। साथ ही उन्होंने दोहराया कि वह अपनी इच्छा से धरना स्थल पर हैं और शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

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