बिना डॉक्टर की पर्ची अब नहीं मिलेंगी ये दवाएं, सरकार ने लागू किए सख्त नियम
अल्कोहल युक्त दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब अधिक मात्रा में एथिल अल्कोहल (इथेनॉल) वाली कई दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी। सरकार ने इन दवाओं को कड़े नियामकीय दायरे में लाते हुए लाइसेंस, प्रिस्क्रिप्शन और बिक्री का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और जरूरतमंद मरीजों तक सुरक्षित तरीके से दवाएं पहुंचाना है।
अल्कोहल युक्त दवाओं पर सरकार की बड़ी कार्रवाई
केंद्र सरकार ने अधिक मात्रा में एथिल अल्कोहल (इथेनॉल) युक्त औषधीय फॉर्मूलेशनों की बिक्री और वितरण को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसी दवाओं की बिक्री केवल वैध डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकेगी। साथ ही इन्हें बेचने वाले मेडिकल स्टोर और वितरकों के लिए आवश्यक लाइसेंस लेना भी अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम दवाओं के चिकित्सीय उपयोग को सुरक्षित बनाए रखने और इनके गैरकानूनी इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार कई ऐसी औषधीय तैयारियां, जिनमें 80 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल मौजूद होता है, पहले अनुसूची-के के तहत लाइसेंस संबंधी छूट का लाभ ले रही थीं। इनमें इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित टिंचर जैसी दवाएं शामिल थीं। कई राज्यों ने केंद्र सरकार को इन दवाओं के नशे के उद्देश्य से दुरुपयोग की शिकायतें भेजी थीं। इन्हीं सुझावों और रिपोर्टों के आधार पर सरकार ने नियमों को सख्त करने का फैसला लिया है।
किन दवाओं पर लागू होंगे नए नियम?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन औषधीय उत्पादों में 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल मौजूद है और जिनकी पैकिंग 30 मिलीलीटर से अधिक है, वे अब अनुसूची-के के तहत मिलने वाली छूट के पात्र नहीं होंगे। ऐसे उत्पादों के निर्माण, वितरण और बिक्री के लिए अब औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इससे दवा आपूर्ति श्रृंखला अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बन सकेगी।
अब डॉक्टर की पर्ची और बिक्री का रिकॉर्ड भी जरूरी
सरकार ने इन अल्कोहल युक्त दवाओं को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-एच1 में भी शामिल कर दिया है। इसका मतलब है कि अब ये दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकेंगी। मेडिकल स्टोर संचालकों को प्रत्येक बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच की जा सके। इससे दवाओं की निगरानी और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।
दुरुपयोग पर लगेगी रोक, मरीजों को होगी सुरक्षित उपलब्धता
सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पाद केवल अधिकृत दवा आपूर्ति प्रणाली के माध्यम से ही मरीजों तक पहुंचेंगे। इससे इनके दुरुपयोग, अवैध बिक्री और दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल की संभावना काफी कम होगी। साथ ही जिन मरीजों को चिकित्सकीय आवश्यकता होगी, उन्हें डॉक्टर की सलाह के आधार पर ये दवाएं पहले की तरह उपलब्ध होती रहेंगी। सरकार ने इसे जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और दवा नियमन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।