Rajasthan News: टैगोर ब्रांड सरसों तेल के 3 बैच असुरक्षित घोषित, बिक्री पर रोक
राजस्थान में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए टैगोर ब्रांड सरसों तेल के तीन बैचों को जांच में मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित किया है। खाद्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद सरकार ने इन बैचों की बिक्री, वितरण, भंडारण और प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही उपभोक्ताओं से घर में रखा संबंधित बैच का तेल इस्तेमाल न करने और वापस करने की अपील की गई है।
जांच में कौन-से बैच असुरक्षित पाए गए?
‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने बाजार से टैगोर ब्रांड सरसों तेल के नमूने एकत्र किए थे। जयपुर स्थित खाद्य प्रयोगशाला की जांच में बैच नंबर 1, बैच नंबर 2 और बैच नंबर 10 निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और इन्हें स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित माना गया। रिपोर्ट के आधार पर इन बैचों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया।
बिक्री, वितरण और स्टॉक पर तत्काल रोक
खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर संबंधित बैचों के निर्माण, बिक्री, वितरण, भंडारण और दुकानों में प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों के अनुसार यह प्रतिबंध फिलहाल प्रारंभिक रूप से दो महीने या नियमानुसार लागू अवधि तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान यदि प्रतिबंधित बैच बाजार में बिकता मिला तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं से बैच नंबर जांचने की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके घर में टैगोर ब्रांड सरसों तेल मौजूद है तो पहले उसका बैच नंबर जांच लें। यदि बोतल या डिब्बे पर 1, 2 या 10 अंकित है, तो उसका उपयोग न करें और उसे संबंधित विक्रेता के पास वापस कर दें। विभाग ने कहा है कि उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
व्यापारियों को स्टॉक हटाने के निर्देश
प्रदेशभर के थोक और खुदरा व्यापारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने गोदाम और दुकानों में उपलब्ध प्रतिबंधित बैच का पूरा स्टॉक अलग रखें और उसकी जानकारी तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को दें। विभाग यह भी पता लगा रहा है कि असुरक्षित बैच का कितना स्टॉक बाजार में पहुंच चुका है।
मिलावट के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
राजस्थान सरकार का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए राज्यभर में सैंपलिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। सरसों तेल के अलावा घी, मावा, मसाले और अन्य खाद्य उत्पादों की भी नियमित जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाला खाद्य पदार्थ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।