बलूचिस्तान में बढ़ा तनाव, क्वेटा में सुरक्षाकर्मियों के शवों पर बवाल; सेना प्रमुख असीम मुनीर के खिलाफ नारेबाजी
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लगातार हो रहे उग्रवादी हमलों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। क्वेटा के सिविल अस्पताल में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के शव पहुंचने पर परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सेना प्रमुख असीम मुनीर के खिलाफ नारेबाजी हुई और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। बढ़ते सुरक्षा संकट ने पाकिस्तान के सामने कानून-व्यवस्था को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
क्वेटा अस्पताल के बाहर फूटा परिजनों का गुस्सा
बलूचिस्तान में हालिया हमलों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के शव गुरुवार को क्वेटा के सिविल अस्पताल लाए गए। शवों के पहुंचते ही बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। उनका आरोप था कि शवों को समय पर परिवारों को नहीं सौंपा जा रहा है। इसी दौरान प्रदर्शन तेज हो गया और सेना तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
शव सौंपने को लेकर बढ़ा विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी चाहते थे कि मृतकों के शव तुरंत उनके परिजनों को सौंपे जाएं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां उन्हें पहले पुलिस लाइन ले जाने की प्रक्रिया पर जोर दे रही थीं। इस विवाद के चलते प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरना दे दिया। विरोध के कारण कुछ समय तक अस्पताल परिसर में आवाजाही भी प्रभावित रही। बाद में प्रशासन और परिजनों के बीच बातचीत के बाद शव सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।
पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई, अस्पताल क्षेत्र किया सील
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस ने अस्पताल के आसपास के सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। अतिरिक्त पुलिस बल और दंगा नियंत्रण इकाइयों को भी मौके पर तैनात किया गया। अधिकारियों का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और भीड़ को नियंत्रित रखना था। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण कुछ समय तक पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
पांच दिनों में तीन बड़े हमलों से दहला बलूचिस्तान
पिछले पांच दिनों के दौरान बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर तीन बड़े हमले किए गए। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इन घटनाओं में कुल 38 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। वहीं सुरक्षा बलों का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में कई उग्रवादियों को भी मार गिराया गया। हमले क्वेटा के निकट हन्ना उराक घाटी, जियारत जिले के मांगी बांध क्षेत्र और बेला-विंडर इलाके में हुए, जहां अलग-अलग उग्रवादी संगठनों पर हमलों की जिम्मेदारी का आरोप लगाया गया है।
बढ़ती हिंसा से पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौती गहराई
विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उग्रवादी गतिविधियों में वृद्धि और सुरक्षा बलों पर लगातार हो रहे हमलों ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भरोसा कायम रखना भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।