मानसून से लबालब हो रहा बीसलपुर बांध, 5 दिन में 83 दिन की पेयजल आपूर्ति जितना बढ़ा जल भंडारण
राजस्थान में सक्रिय मानसून ने बीसलपुर बांध को नई संजीवनी दी है। पिछले पांच दिनों में बांध में लगभग 0.83 टीएमसी पानी की आवक दर्ज की गई है, जो करीब 83 दिनों की पेयजल आपूर्ति के बराबर मानी जा रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर से जयपुर, अजमेर, टोंक सहित कई शहरों और हजारों गांवों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
मानसून की बारिश से लगातार बढ़ रहा जलस्तर
बीसलपुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में हो रही बारिश का असर अब बांध के जल भंडारण पर साफ दिखाई दे रहा है। जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मंगलवार सुबह तक बांध का जलस्तर 313.68 आरएल मीटर दर्ज किया गया, जबकि कुल जल भंडारण 26.079 टीएमसी तक पहुंच गया है, जो बांध की कुल क्षमता का 67.38 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में 5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस मानसून सीजन में अब तक कुल 253 मिमी बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है।
पांच दिनों में बढ़ा 0.83 टीएमसी पानी, पेयजल व्यवस्था को बड़ी राहत
पिछले पांच दिनों के दौरान बीसलपुर बांध में लगभग 0.83 टीएमसी अतिरिक्त पानी की आवक हुई है। जल विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा करीब 83 दिनों की पेयजल आपूर्ति के बराबर मानी जा रही है। लगातार बढ़ रहे जल भंडारण से आने वाले महीनों में संभावित पेयजल संकट की आशंका काफी हद तक कम हुई है। जल संसाधन विभाग भी बांध की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और बारिश के रुझानों का आकलन कर रहा है।
लगातार बढ़ते जल भंडारण से मजबूत हुई उम्मीदें
बीते कुछ दिनों में बांध के जलस्तर और जल भंडारण में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। 3 जुलाई को जहां जल भंडारण 25.320 टीएमसी था, वहीं अगले दिनों में इसमें लगातार बढ़ोतरी होती रही और अब यह 26 टीएमसी से अधिक पहुंच चुका है। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कैचमेंट क्षेत्र में हो रही नियमित बारिश बांध को लगातार पानी उपलब्ध करा रही है। इससे प्रदेश की पेयजल योजनाओं को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
जयपुर, अजमेर और टोंक समेत लाखों लोगों को मिलेगा लाभ
बीसलपुर बांध राजस्थान के प्रमुख पेयजल स्रोतों में शामिल है और इससे जयपुर, अजमेर, टोंक सहित कई शहरों तथा हजारों गांवों को पानी की आपूर्ति होती है। ऐसे में बांध में बढ़ता जल भंडारण न केवल शहरी क्षेत्रों बल्कि ग्रामीण इलाकों के लिए भी राहतभरी खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून का मौजूदा दौर जारी रहा और जलग्रहण क्षेत्र में अच्छी बारिश होती रही तो आने वाले दिनों में जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। इससे पेयजल प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण और कृषि क्षेत्र को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।